लापरवाही की हद: नगर परिषद के ढुलमुल रवैये का खामियाजा भुगत रही वार्ड जनता, कच्ची नालियों ने बढ़ाई मुसीबत
सरदारपुर पुराना हाइवे रोड सड़क या मौत का कुआँ? हर कदम पर गड्ढों ने बिछाया खतरों का जाल
जल्द अगर सुनवाई न हुई तो जनता के हित में हड़ताल पर बैठेगे पार्षद प्रतिनिधि रामेश्वर मारु
मनोज बैरागी सरदारपुर धार
मानसून की शुरुआत होते ही नगर परिषद सरदारपुर की दावों की पोल खुलनी शुरू हो गई है। परिषद की घोर लापरवाही और उदासीनता का सबसे बड़ा खामियाजा इस समय वार्ड क्रमांक 13 और वार्ड क्रमांक 15 की जनता को भुगतना पड़ रहा है। बारिश के इस मौसम में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने से दोनों वार्डों के रहवासी नर्क जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
कच्ची नालियां बनीं मुसीबत, थमा पानी का निकास
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वार्डों में पक्की नालियों का निर्माण न होने के कारण नालियां पूरी तरह कच्ची हैं। बारिश का पानी आते ही ये कच्ची नालियां ढह गईं और मिट्टी के मलबे से चोक हो गईं। पानी की निकासी पूरी तरह ठप होने से गंदा और बदबूदार पानी सड़कों पर और लोगों के घरों के सामने जमा हो रहा है।
बीमारियों का खतरा, सड़न और गंदगी का अंबार
सड़कों पर जमा इस गंदे पानी के कारण पूरे क्षेत्र में भारी गंदगी और सड़न पैदा हो गई है। मच्छरों और कीड़े-मकौड़ों का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि वार्डों में मलेरिया, डेंगू और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा मंडराने लगा है। बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना भी दूभर हो गया है।
पार्षद संतोषी मारु एंव ज्योति पँवार ने कई बार गुहार लगा चुकि हैं।पार्षद और वार्डवासियों का कहना है, “हमने कई बार नगर परिषद के चक्कर काटे, सीएमओ और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ खोखले आश्वासन मिलते हैं। टैक्स हम समय पर देते हैं, तो फिर इस नरकीय स्थिति में रहने को क्यों मजबूर हैं?
मुख्य सवाल जो नगर परिषद से पूछे जाने जरूरी हैं
जब मालूम था कि बारिश का मौसम आने वाला है, तो समय रहते कच्ची नालियों की सफाई और वैकल्पिक ड्रेनेज व्यवस्था क्यों नहीं की गई?स्वच्छ भारत अभियान का दम भरने वाली नगर परिषद की नाक के नीचे दो-दो वार्ड गंदगी के ढेर में क्यों तब्दील हो रहे हैं?क्या परिषद को किसी बड़ी महामारी के फैलने का इंतजार है?