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शिवपुरी की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, नवजात हुआ एम्बुलेंस में, नाड़ी कटवाने लाए सिरसौद स्वास्थ्य केंद्र, न डॉक्टर मिले न नर्स

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– रास्ते में हो गई डिलेवरी तो दूसरे स्वास्थ्य केंद्र पर नवजात की नाड़ी तक नहीं कटी

– मोहन सरकार में प्रदेश के ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल

रंजीत गुप्ता शिवपुरी

शिवपुरी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का बुरा हाल है। एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमें जहां एक प्रसूता को जिले की पीएससी खोड़ से जिला अस्पताल रैफर किया गया। 108 जननी एम्बुलेंस से रैफर के दौरान महिला की डिलेवरी एंबुलेंस में ही हो गई लेकिन इस दौरान रास्ते के दूसरे सिरसौद केंद्र पर जननी एम्बुलेंस महिला को लेकर पहुंची तो वहां पर न कोई डॉक्टर मिला न अन्य कोई नर्सिंग स्टाफ। इतना ही नहीं गर्भवती महिला की अन्य महिला परिजनों ने एम्बुलेंस में ही जैसे-तैसे डिलीवरी करवाई। इसके बाद नवजात की नाड़ी कटवाने के लिए सिरसौद के स्वास्थ्य केंद्र पर कोई नर्सिंग स्टाफ नहीं मिला तो नाड़ी काटने तक का काम प्रसूता महिला की साथी महिलओं ने किया।

एंबुलेंस से भेजा बड़े अस्पताल तो रास्ते में हो गई डिलेवरी-

बताया जाता है कि खोड़ चौकी क्षेत्र के नादिया नया खेरा गांव की प्रसूता सीमा लोधी पत्नी नहार सिंह लोधी को प्रसव पीड़ा के बाद खोड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। लेकिन यहां से सीमा लोधी रविवार की सुबह डॉक्टर ने जिला अस्पताल में भर्ती रैफर कर दिया। परिजन प्रसूता को लेकर 108 जननी एम्बुलेंस में सवार होकर जिला अस्पताल के लिए निकले थे। तभी वरौनी-नाऊली गांव के बीच प्रसूता सीमा लोधी के तेज प्रसव पीड़ा उठने लगी। बच्चा भी ओवरी में फंस गया था। एम्बुलेंस के ड्राइवर ने पहले सिरसौद के स्वास्थ्य केंद्र पर एम्बुलेंस को ले जाने का फैसला लिया था। लेकिन सिरसौद के स्वास्थ्य के केंद्र पहुंचने से पहले सीमा ने नवजात को जन्म दे दिया। एम्बुलेंस में सवार महिलाओं ने प्रसव में सहयोग किया। नवजात की नाड़ी कटवाने के लिए सिरसौद के स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां स्वास्थ्य केंद्र परिजनों को न ही डॉक्टर से लेकर कोई भी नर्सिग स्टाफ स्टाफ नहीं मिला। बाद में महिलाओं ने नवजात की नाड़ी काट दी। परिजनों को सिरसौद के स्वास्थ्य केंद्र के बाहर डॉक्टर या नर्सिग स्टाफ आने का इन्तजार करना पड़ा।

शिवपुरी के ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्रों का बुरा हाल-

बताया जाता है कि इस समय जिले के ग्रामीण इलाकों में जो स्वास्थ्य केंद्र हैं वहां पर बुरा हाल है। सिरसौद के स्वास्थ्य केंद्र में वर्तमान में एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। यहां तीन नर्सिंग स्टाफ पदस्थ थे। लेकिन वह भी ट्रेनिंग के नाम पर अस्पताल नहीं आ रहीं है। ग्रामीणों की माने तो यहां करैरा की एक नर्स को अटैच कर रखा है। उसी के ऊपर पूरे अस्पताल का स्वास्थ्य सेवाओं का बोझ डाल दिया गया। सिरसौद पंचायत के सरपंच अतर सिंह लोधी ने बताया कि सिरसौद के स्वास्थ्य केंद्र में लंबे से समय मरीजों और घायलों को प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पा रहा है। यहाँ न ही डॉक्टरों की तैनाती की गई है और न ही कोई जिम्मेदार नर्सिंग स्टाफ को तैनात किया गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के कई सड़क हादसे हो जाते हैं। लेकिन घायलों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता है।

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