श्रीकृष्ण की ससुराल जामगढ़-भगदेई पहुंचे आईएएस अंकित कुमार जैन, कहा पीढ़ियों को कुछ देकर जाएं
पाण्डुलिपियों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर किया जनसंवाद
प्रांजलकमल याज्ञवल्क्य बरेली रायसेन
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की महत्वाकांक्षी पहल “ज्ञान भारतम्” के अंतर्गत देश की प्राचीन पाण्डुलिपियों एवं हस्तलिखित विरासत को डिजिटली संरक्षित करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि रायसेन जिले के बरेली अनु विभाग के जामगढ़ की जामवंत गुफा को मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री-राजर्षि नरेन्द्र शिवाजी पटेल की विशेष रुचि के चलते मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने श्रीकृष्ण पाथेय में शामिल किया है।
महत्वाकांक्षी “ज्ञान भारतम् ” योजना के तहत आईएएस अधिकारी अंकित कुमार जैन रायसेन जिले के बरेली अनुभाग अंतर्गत स्थित भगवान् श्रीकृष्ण की ससुराल ऐतिहासिक ग्राम जामगढ़ एवं भगदेई पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन कर ग्रामीणों, बुजुर्गों और इतिहास प्रेमियों से संवाद किया।भगवान श्रीकृष्ण की ससुराल के रूप में विख्यात जामगढ़ तथा ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध भगदेई गांव के भ्रमण के दौरान श्री जैन ने यहां के मंदिरों, मठों, प्राचीन स्थलों और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने ग्रामीणों से क्षेत्र में सुरक्षित पुरानी पाण्डुलिपियों, बीजकों तथा अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त की और उन्हें राष्ट्रीय धरोहर के रूप में संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि पीढ़ियों तक समृद्ध इतिहास की जानकारी सुलभता से उपलब्ध रहे।
भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति इतिहास और सभ्यता की धरोहर हैं पाण्डुलिपियां : श्रीजैन
ग्रामीणों से संवाद करते हुए आईएएस बरेली एसडीएम अंकित कुमार जैन ने कहा कि भारत की प्राचीन पाण्डुलिपियां केवल कागज पर लिखे शब्द नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, इतिहास और सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं। इनका डिजिटलीकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के विशाल भंडार को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
सहजता और सरलता की मिसाल बने आईएएस श्री जैन
जामगढ़ और भगदेई के भ्रमण के दौरान आईएएस अधिकारी अंकित जैन की सादगी और सहज व्यवहार ग्रामीणों के बीच विशेष चर्चा का विषय रहा। भगदेई स्थित प्राचीन श्री शिव मंदिर परिसर में उन्होंने किसी औपचारिकता के बिना जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से बीजक, प्राचीन दस्तावेजों और स्थानीय इतिहास से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की। मंदिर के बाहर जमीन पर बैठकर बीजक की फोटो और अध्ययन करते रहे। विशाल पत्थरों पर लिखे दो लाइनों के प्राचीन बीजक और मानवाकृति के पदचिन्हों को काफी समय तक निहारते रहे।।

यहां भी बिना बिछावन मंदिर की सीढियों पर ही बैठ गए श्रीजैन
जामगढ़ में जामवंत गुफा मार्ग स्थित पवित्र जामवंत सरोवर के समीप श्रीरामजानकी मंदिर की सीढ़ियों पर बैठकर उन्होंने ग्रामीणों, बुजुर्गों और युवाओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने जामवंत सरोवर, मंदिर, प्राचीन परंपराओं तथा क्षेत्र में उपलब्ध पाण्डुलिपियों और ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उनकी आत्मीयता और सरलता ने ग्रामीणों का मन जीत लिया तथा लोगों ने खुलकर अपने अनुभव और जानकारी साझा की।
ऐतिहासिक धरोहरों से हुए अभिभूत, कहा- अद्भुत हैं इतिहास
भ्रमण के दौरान जामगढ़-भगदेई क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन धार्मिक स्थलों और लोक इतिहास की परंपरा से आईएएस अंकित कुमार जैन विशेष रूप से प्रभावित दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि पूरे अनु विभाग के गांव गांव में संपर्क कर विरासत और पाण्डुलिपियों की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करेगें। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ऐसी अनेक अमूल्य पाण्डुलिपियां, बीजक और ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं, जिनका संरक्षण और डिजिटलीकरण अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है।ज्ञान भारतम् अभियान के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि देश के दूरस्थ गांवों तक पहुंचकर वहां विखरी ज्ञान-संपदा को खोजा जाए और आधुनिक तकनीक की सहायता से उसे सुरक्षित रखा जाए। जामगढ़ और भगदेई का यह भ्रमण भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि यहां की विरासत वास्तव में अद्भुत है। साथ ही उन्होंने जामगढ़ के प्राचीन तालाब के जीर्णोद्धार के लिए जनपद पंचायत बाड़ी को योजना बनाने के लिए कहा। ग्रामीणों और इतिहास प्रेमियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इससे क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त होगी।