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सांची विश्वविद्यालय अपार आई.डी प्रदान करने के लिये पंजीकृत

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• एक राष्ट्र-एक छात्र आई.डी. पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

• वन नेशन, वन स्टूकडेंट कार्ड में छात्रों की होगी सारी शैक्षणिक जानकारी
• डिजिलॉकर और अकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से भी जुड़ेगी APAAR ID

रायसेन। सांची विश्वविद्यालय को अपार आई.डी (APAARID) प्रदान करने के लिए पंजीकृत किया गया है। रायसेन, विदिशा और आसपास के ज़िलों के छात्र व अभिभावक सांची विश्वविद्यालय के माध्यम से अपार आई.डी का रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। समस्त छात्रों को केन्द्र की “एक राष्ट्रय, एक छात्र आई.डी.” योजना का लाभ प्राप्त हो सकेगा।


नई दिल्ली में आयोजित ‘एक राष्ट्र, एक छात्र आई.डी’ राष्ट्रीय सम्मेलन केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धमेन्द्र प्रधान की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। देश भर के समस्त विश्वाविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, एवं नोडल अधिकारी इस सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के छात्रों लिए अपार आई.डी प्रदान करने के लिए नोडल सेंटर तय किए गए।
“एक राष्ट्र एक छात्र आई.डी” योजना के तहत 25 करोड़ छात्रों की यूनिक आईडी तैयार की जा चुकी है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 से बालवाटिका(पूर्व में नर्सरी) से लेकर पीएच.डी. और कौशल विकास में छात्रों की पहचान इस 12 अंक की ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR) से होगी। यह आईडी भारतीय छात्रों को वैश्विक स्तर पर भी सुविधाएं प्रदान करेगी। यही आई. डी. उसकी पहचान होगी।
सांची विश्वविद्यालय की ओर से इस सम्मेलन में सम्मिलित हुए परीक्षा नियंत्रक डॉ. हरीश चन्द्रवंशी ने बताया कि आईडी से बोर्ड परीक्षा, जेईईमेन, नीट, सीयूईटीयूजी, पीजी समेत अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षा, दाखिला, स्कॉलरशिप, ट्रांसफर सर्टिफिकेट से लेकर नौकरी के दौरान छात्र के सत्यापन करने में आसानी होगी। इसके अलावा प्रवेश परीक्षा में कोई भी छात्र किसी अन्य की जगह परीक्षा नहीं दे पाएगा। सर्टिफिकेटऔर डिग्री की धोखाधड़ी से निजात मिलेगी। योजना में छात्रों का डाटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा यानी किसी प्रकार की कोई जानकारी किसी से साझा नहीं होगी।


डॉ. चन्द्रवंशी ने जानकरी दी कि बालवाटिका में दाखिला लेते ही छात्र का नाम APAAR से जुड़ जाएगा। उसमें छात्र और माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, लिंग, फोटो, पता और आधार नंबर डाला जाएगा। इससे एक स्कूल से दूसरे स्कूल में ट्रांसफर प्रोसेस आसान हो जाएगा, साथ ही गवर्नमेंट बॉडीज़ द्वारा निगरानी भी हो जाएगी। साथ ही यह विभिन्न संस्थानों में ड्रॉपआउट दरों पर नज़र रखने की प्रक्रिया को आसान बना देगा तथा एजुकेशन सिस्टम का ट्रैक रिकॉर्ड बनाए रखेगा। इसके अलावा ट्रांसफर सर्टिफिकेट के लिए भी अभिभावकों को अब नहीं भटकना पड़ेगा।
यह आई.डी. डिजिलॉकर और अकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से भी जुड़ जाएगी। जैसे ही छात्र कोई कोर्स, डिग्री, सर्टिफिकेट, स्किल कोर्स समेत अन्य कोई उपलब्धि हासिल करता है तो उसके सर्टिफिकेट उसमें जुड़ जाएंगे। इससे छात्र की शैक्षणिक योग्यता और सर्टिफिकेट की जांच अलग से नहीं होगी। योजना के तहत स्कूल से लेकर उच्चशिक्षा तक छात्र देश में कहीं से भी अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेगा उसका रिकार्ड केंद्रीयकृत रहेगा।

 

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