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ठिठुरन से कंपकंपाया प्रदेश, दतिया में 3.2 डिग्री तापमान, पांच शहरों में चली शीतलहर

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भोपाल। अरब सागर से आ रही नमी और उत्तर भारत की तरफ से लगातार आ रही सर्द हवाओं के कारण प्रदेश में ठिठुरन बरकरार है। रात में जहां कड़ाके की सर्दी बनी हुई है, वहीं कोहरा, बादल बने रहने के कारण दिन में भी सिहरन बनी हुई है। इसी क्रम में रविवार को प्रदेश में सबसे कम 3.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दतिया में रिकार्ड किया गया। ग्वालियर में रात का पारा 4.1 डिग्री सेल्सियस रहा। दतिया, सागर, ग्वालियर, गुना एवं राजगढ़ में शीतलहर का प्रभाव रहा। प्रदेश के 05 शहरों में रात का तापमान 05 डिग्री सेल्सियस से कम व 23 शहरों में 10 डिग्री सेल्सियस से कम रहा। प्रदेश में 50 मीटर से भी कम दृश्यता भोपाल एवं दतिया में दर्ज की गई। राजधानी भोपाल में भी रात के तापमान में गिरावट का सिलसिला बना हुआ है। रविवार को न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे कम तापमान रहा।

उधर पिछले 24 घंटों के दौरान रविवार सुबह साढ़े आठ बजे तक मलाजखंड में 3.6, नरसिंहपुर में 3.0, नर्मदापुरम में 2.8, उमरिया में 1.8 एवं जबलपुर, मंडला में 0.6 मिलीमीटर वर्षा हुई। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक अभी दो-तीन दिन तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रह सकता है। इस दौरान ठंड के तेवर और तीखे भी हो सकते हैं।

मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर भारत क्षेत्र में सक्रिय जेट स्ट्रीम के असर से पूरे मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। अगले दो दिन में न्यूनतम तापमान में और भी गिरावट होने की संभावना है। जिसकी वजह से कई अन्य शहर भी शीतलहर की चपेट में आ सकते हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में हरियाणा में हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। एक चक्रवात उत्तरी-मध्य महाराष्ट्र पर भी बना है। कर्नाटक से लेकर मध्य महाराष्ट्र से होकर विदर्भ तक एक द्रोणिका बनी हुई है। इसकी वजह से अरब सागर से नमी आ रही है। इस वजह से प्रदेश के अधिकतर शहरों में बादल बने हैं और कोहरा भी छा रहा है। साथ ही जबलपुर, शहडोल, नर्मदापुरम, भोपाल संभाग के जिलों में कहीं-कहीं वर्षा भी हो रही है। इसके अलावा लगभग 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर वेस्टर्न जेट स्ट्रीम (पश्चिम से पूर्व की तरफ काफी तेज रफ्तार से बहने वाली हवाओं का समूह) अभी भी मौजूद है। जेट स्ट्रीम जहां भी सक्रिय रहता है, वहां के मौसम के मिजाज के लिए उत्प्रेरक का काम करता है। यही वजह है कि प्रदेश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में घने कोहरे का असर बरकरार है।
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