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युवा सरकारी नोकरी इसलिए चाहता है कि कम काम करना पड़े: डॉ दयानंद समेले

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एक दिवसीय जिला स्तरीय युवा चेतना शिविर संपन्न

धीरज जॉनसन दमोह

अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के तत्वावधान में गायत्री परिवार द्वारा स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ पर एक दिवसीय जिला स्तरीय युवा चेतना शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ दयानंद समेले ने कहा कि युवा सरकारी नौकरी इसलिए चाहता हैं कि उसको काम कम करना पड़े,ऊपरी आमदनी होती रहे, जहां सरकारी नोकरी का उद्देश देश सेवा के साथ ही अपना,अपने परिवार के भरण पोषण के लिए अनुपातिक आय प्राप्त करना होना चाहिए,वहां अब युवा सिर्फ ऊपरी कमाई के लिए भी सरकारी काम चाहता है ताकि वेतन सुरक्षित रहे, रोब बना रहे, और देश सेवा के भाव से नोकरी ना करना पड़े।


गायत्री परिवार, दमोह के युवा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित युवा चेतना शिविर में गायत्री शक्तिपीठ के सभागार में मार्गदर्शन देते हुए शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे अमर धाकड़, इंजीनियर नेतराम कुर्मी ने युवक युवतियों को आव्हान किया कि हमे अपने विवेक का अवलंबन लेते हुए कोई भी निर्णय लेना चाहिए, भेड़चाल में नही चलना  चाहिए, यदि कोई राजनेता हमारी युवा शक्ति का दुरुपयोग करते हुए सिर्फ अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहता हैं तो उसका निर्णय अपने विवेक से लेना हैं, क्योंकि आज 90% नेता गरीबी को दूर करते हुए खुद गरीबी से दूर हो गए और उनके अनुयाई आज भी गरीब बने हुए हैं।

इंजीनियर दिलीप कटारे ने कहा की मैं छह दिन सुबह से शाम अपनी नोकरी करता हूं और रविवार गायत्री मिशन के कार्य के लिए अलग अलग शहरों में जाकर युवाओं को युग धर्म निभाने के लिए प्रेरित करता आ रहा हूं और उसी क्रम में आज आपके शहर में आया हूं। स्टीबजाब्स जब बिजनेस में फेल हो गया तब अमेरिका में किसी ने उससे कहा कि तुम भारत जाओ, हरिद्वार में कोई सिद्ध मिल सकता हैं जो तुम्हे सही दिशा दे सकता हैं, हम सबको पता हैं कि लौट कर उसने एपल नामक कंपनी बनाई और दुनिया का सबसे धनवान व्यक्ति बन गया। मार्क जुकर वर्ग के फेल हो जाने पर उसको भी स्टीबजाबस ने कहा कि भारत जाओ, नीम करोली बाबा से मिलो और आज सारी दुनिया उसकी एक तरह से गुलाम है,फेसबुक, व्हाट्सएप, सोशल मीडिया के बादशाह बने हुए हैं। इसका मतलब युवाओं को अध्यात्म से जुड़े बिना सही दिशा नही मिल सकती।सनातन पूजा पद्धति ही अध्यात्म कि पहली सीढ़ी हैं। युवाओं को क्या हर मानव को शाकाहार ही अपनाना चाहिए, भले ही शेर जंगल का राजा कहा जाता हैं किंतु शाकाहारी हाथी, गेंडे, भेसें से आमने सामने का मुकाबला नहीं कर सकता, हमेशा पीछे से, छुपकर ही हमला करता हैं,मांसाहारी भीतर से बहुत कमजोर होता हैं।
शिक्षिका नम्रता सेन ने कहा कि हम माताएं ही हैं जो अपनी इच्छा अनुसार संतानों का निर्माण करते हैं। क्या कारण हैं कि जब माता मदालसा ने अपनी रुचि के अनुरूप अपनी आठों संतानों को गढ़ा, ऋषि कहोड़ की पत्नी सुजाता ने गर्भ में ही अष्टावक्र को ब्रह्मज्ञान प्रदान कर दिया, अर्जुन जब अपनी पत्नि सुभद्रा को चक्रव्यूह भेदन करने की विधा सुना रहे थे और गर्भवस्त शिशु अभिमन्यु सब सुन रहा था, किंतु उस शिशु का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि सुनते सुनते उसकी माता सो गई और अभिमन्यु चक्रव्यूह से बाहर आने की कला नही सीख पाया और चक्रव्यूह तोड़ तो दिया किंतु बाहर निकलना नही सीख पाया और कोरवो के हाथों वीर गति को प्राप्त हुआ।
रामकिशन मिश्रा, रामशंकर मिश्रा,नीलेश रैकवार की प्रज्ञा टोली द्वारा कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रज्ञा गीतो से शुभारंभ किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो रघुवीर पटेल ने किया और आभार प्रदर्शन भूपेंद्र तिवारी द्वारा किया गया।

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