देवेन्द्र तिवारी सांची रायसेन
सांची के आसपास प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर फैली पडी हैं तथा खुले आसमान के नीचे यह धरोहर अपने आप मे प्राचीन सभ्यता समेटे हुए हैं जहाँ कुछ धरोहरों को पुरातत्व विभाग ने अपने अधीन कर लिया तो कुछ आज भी खुले आसमान के नीचे बिखरी पड़ी है जिनकी देखरेख एवं सुरक्षा का जिम्मा ग्रामीण स्वयं सम्हाल रहे है ।
जानकारी के अनुसार नगर से डेढ किमी दूर स्थित नागौरी की पहाड़ी है यह पहाडी अपने आप मे अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाये हुए हैं इस पहाडी से कुछ प्राचीन धरोहर तो पुरातत्व विभाग द्वारा अपने पर सुरक्षित कर लिया तो कुछ धरोहर आज भी अपने हजारों साल प्राचीन होने की गवाही दे रही हैं इनमे से हजारों साल प्राचीन नाग देव की प्रतिमा हैं जो नागौरी की पहाड़ी पर खडी हैं ग्रामीण बताते है यह हजारों साल प्राचीन प्रतिमा है इस प्राचीन प्रतिमा की सुरक्षा व देख रेख स्वयं ग्रामीण करते हैं तथा तीज त्योहार पर इस प्रतिमा पर जागरूक नागरिक पहुंच कर साफसफाई करते हैं तथा पूजा अर्चना की जाती हैं तथा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते है यह प्रतिमा नागदेवता की बताई जाती हैं।
इस प्रतिमा पर नागो के आकार की कलाकृतियां बनीं हुई हैं तथा यह प्रतिमा नागदेवता की बताई जाती हैं तथा इस प्रतिमा को श्रद्धा के कारण ग्रामीण इस प्रतिमा की सुरक्षा करते है तथा साफसफाई के साथ ही इस प्रतिमा की पूजा अर्चना की जाती हैं इतना ही नहीं समय समय पर इस प्रतिमा पर दीपक जलाने का क्रम भी जारी रहता है जिससे यह आस्था का केंद्र भी बन गया है।
हालांकि इस पहाड़ी का अधिकांश क्षेत्र पर सौलर प्लांट निर्मित हो चुका है वैसे भी यह श्रावण माह जो अपने आप मे भक्ति का माह माना जाता है तथा इस माह में भगवान शिव की भक्ति की जाती हैं इस भक्ति के माह में ग्रामीणों ने यहां पहुंच कर साफसफाई की तथा पूजा अर्चना करते हुए भक्ति मे लीन दिखाई दिये ।तथा समय समय पर इस नागदेव की पूजा अर्चना करने का सिलसिला चलता रहता है यही कारण है यह प्रतिमा जो लगभग आठफिट ऊंची खडी है आज भी अपने हजारों साल प्राचीन की कहानी बयां कर रही हैं तथा आस्था के केंद्र के रूप में प्रसिद्धि पाये हुए हैं।