प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने गोदाम स्तरीय उपार्जन केन्द्र बनाने पर बल
पंजीकृत किसानों का सत्यापन भी किया जाएगा
देवेन्द्र कुमार जैन भोपाल
भोपाल और नर्मदापुरम संभाग की रबी उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा के दौरान तय किया गया है कि जिन किसानों ने पंजीयन करवाया है उनका एक सप्ताह में राजस्व अमले द्वारा सत्यापन करवा लिया जाए जिससे वास्तविक किसानों से ही सुविधाजनक ढंग से गेहूँ की खरीदी की जा सके । संभागायुक्त भोपाल के सभाकक्ष में शुक्रवार को सम्पन्न हुई बैठक की अध्यक्षता खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने की । संभागायुक्त नर्मदापुरम आपूर्ति निगम के संचालक तथा भोपाल, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, बैतूल हरदा और नर्मदापुरम जिलों के कलेक्टर भी उपस्थित थे ।
बैठक में प्रमुख सचिव उमराव ने धान खरीदी की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं के लिए कलेक्टर्स को धन्यवाद देते हुए अपेक्षा की है कि गेहूँ की खरीदी की व्यवस्थाएं और भी बेहतर होंगी । रबी सीजन में समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी का लक्ष्य लगभग पूर्व वर्ष अनुसार ही तय किये जाने पर सहमति बनी है । कलेक्टर्स ने अब तक हुए पंजीयन की जानकारी प्रस्तुत की । भोपाल में 32468, सीहोर में 79670, रायसेन में 66420, राजगढ़ में 71059 और बैतूल में 20404 किसानों ने पंजीयन करवाया है । बैठक में बताया गया कि समर्थन मूल्य से अधिक कीमत के चलते गुणवत्तापूर्ण गेहूँ के किसानों ने इस बार अपेक्षाकृत कम पंजीयन करवाया है ।
उमराव ने बताया कि भोपाल संभाग के विदिशा और नर्मदापुरम के नर्मदापुरमजिले में पंजीयन के सत्यापन के अलावा अन्य सभी जिलों में भी सत्यापन करवाया जाए । उन्होंने बताया कि धान खरीदी में जबलपुर में फर्जी पंजीयन पकड़ने से धान खरीदी में आसानी हुई है और शासन को लगभग 100 करोड़ रूपये की बचत हुई है । उन्होंने निर्देश दिए कि विगत वर्ष के पंजीयन से 50 प्रतिशत अधिक पंजीकृत रकबा वाले, 4 हेक्टेयर से अधिक रकबाधारी, सिकमी, बटाईदार, किसान एवं अन्य के स्वामित्व से पंजीयन, गिरदावरी किसान एप से पंजीयन, भू अभिलेख और पंजीकृत किसान के नाम में भिन्नता और नवीन पंजीकृत किसान का सत्यापन किया जाए ।
संचालक पिथौड़े ने कलेक्टर्स से कहा कि वे खरीदी केन्द्र एफसीआई के गोदाम और अन्य ऐसे गोदामों के पास बनाए जिससे भंडारण और परिहवन की स्थिति पैदा ही नहीं हो । उन्होंने कहा कि पूर्व का बचा बारदाने का पहले उपयोग करें, उन्होंने बताया कि बारदाना की कोई समस्या नहीं है । बैठक में किसान द्वारा स्लाट बुकिंग की प्रक्रिया भी बताई गई । वे ही किसान स्लाट बुक कर सकेंगे जिनके बैंक खाता आधार और मोबाइल से लिंक होंगे । किसान स्वयं किसी भी विक्रय केन्द्र का चयन कर सकेगा ।
बैठक में बताया गया कि रबी उपार्जन में प्रस्तावित नवीन प्रावधान के अनुसार एनआरएल एम को आवंटित उपार्जन केन्द्र स्टील स्व सहायता समूह एवं एफपीओ, एफपीसी को एक-एक ही उपार्जन केन्द्र का कार्य सौंपा जाये । इन संस्थाओं को आवंटित उपार्जन केन्द्र स्टील साइलो, साइलो बैग, गोदाम एवं केप पर ही स्थापित किये जायेंगे । विशेष परिस्थिति में गोदाम स्तरीय केन्द्र से अन्यत्र केन्द्र की स्थापना राज्य शासन की अनुमति से की जा सकेगी । कृषक के आधार नंबर से लिंक बैंक खाते में राशि भुगतान किसी प्रकार की तकनीकी समस्या होने अथवा कृषक के पास आधार नंबर न होने पर कृषक द्वारा पंजीयन में दिये गये बैंक खाते में भुगतान की कार्यवाही की जा सकेगी ।
जिले में शासकीय भंडारणक्षमता हेतु जिले को इकाई माना जाएगा । कृषक द्वारा उपज विक्रय हेतु स्लाट बुकिंग उपार्जन के अंतिम 10 दिवस को छोड़कर की जा सकेगी एवं स्लॉट की वैधता सात कार्य दिवस होगी ।
कलेक्टर्स से कहा गया है कि वे उपार्जन केंद्र पर भौतिक एवं अन्य सुविधाएँ के तहत निर्धारित हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन एवं निर्वाध विधुत /जनरेटर सुविधा, इलेक्ट्रानिक उपकरण- कम्प्यूटर, प्रिंटर, डोंगल, स्वेनर, यूपीएस, लेपटॉप, बैटरी की व्यवस्था करें । जन सुविधाएं – दरियां, टेबल, कुर्सी, पेयजल, शौचालय, छाया, बिजली आदि, केलिब्रेटेड, छन्ना 4 X 6 फीट का, पंखें, परखी, ब्लोअर सूचना पटल, उपार्जन बैनर, तथा भुगतान एवं टोल फ्री नंबर का प्रदर्शन भी करें । सामान्य जानकारी के तहत एफ.ए.क्यू. सेम्पल, एफ.ए.क्यू. गुणवत्ता का मापदण्ड, सुरक्षा सुविधाएं तिरपाल, कवर, अग्निशमन यंत्र, रेत, बाल्टियां, फर्स्ट एड बाक्स आदि, निर्धारित संख्या में कैलिवेटेड इलेक्ट्रानिक तौलकांटे/वे-ब्रिज ( धर्मकांटा), परखी, उनेगल प्लेट, प्लास्टिक की सेम्पल थैलियों, कपडे की थैलियां, चपडा, मोमबत्ती, माचिस, एजेंसी की पीतल की सील आदि रखें ।
उपार्जन केन्द्र निर्धारण प्रक्रिया के संबंध में बताया गया कि उपार्जन केन्द्र स्थल का निर्धारण जिला उपार्जन समिति द्वारा कलेक्टर के अनुमोदन से किया जायेगा । सामान्यतः गोदाम परिसर पर केन्द्र खोला जाये । केन्द्र पर पूर्ण पंचायत ही टैग की जाये एवं प्रत्येक तहसील में कम से कम एक केन्द्र खोला जाये । कृषकों की संख्या 200 से 750 तक रखी जाये। संचालक खाद्य, कृषक संख्या में 50 प्रतिशत तक कमी अथवा वृद्धि कर सकेगे सामान्यतः केन्द्र 3000 से 5000 मेट्रिक टन मात्रा का उपार्जन किया जाये, जिसमें 50 प्रतिशत तक की कमी अथवा वृद्धि संचालक खाद्य द्वारा की जा सकेगी । यथासंभव मैप किये गये उपार्जन केन्द्र पंचायतों के केन्द्र में हो जिससे कृषकों को सामान्यतः 25 कि.मी. से अधिक दूरी तय न करना पड़े । जिन जिलों में गेहूं का पंजीयन कम हुआ हो वहां मण्डी स्तर पर कम से कम एक केन्द्र खोला जाये, जिसमें न्यूनतम किसान संख्या तथा दूरी का बंधन नहीं रहेगा । जिला उपार्जन समिति द्वारा सुनिश्चित किया जाये कि केन्द्र पर न्यूनतम 3000 मे0टन गेहूं का उपार्जन हो । इससे कम उपार्जन की संभावना होने पर आय व्यय आकलित कर केन्द्र प्रस्तावित हो । किसी भी केन्द्र का समानान्तर उपकेन्द्र नहीं खोला जाये ।
बैठक में कलेक्टर्स से कहा गया है कि वे पूर्व के परिवहन संबंधी देयकों का त्वरित रूप से भुगतान सुनिश्चित कर दें । बैठक में भोपाल और नर्मदापुरम में 25 मार्च से खरीदी प्रारंभ करने पर भी विचार विमर्श किया गया ।
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