सुरेंद्र जैन धरसीवा
सिलतरा से लेकर पूरे प्रदेश में औद्योगिक हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी गरीब श्रमिकों फेक्ट्री कर्मियों की जान पर भारी पड़ रही अब एसकेएस इस्पात में एक हेल्पर की हादसे में दर्दनाक मौत ने मातापिता से उनके बुढ़ापे का इकलौता सहारा ही छीन लिया।
जानकारी के मुताबिक मृतक पुष्पेंद्र पिता गणेशराम साहू उम्र 25 साल कतनई अकलतरा जांजगीर चांपा का निवासी था जो एसकेएस फेक्ट्री की रोलिंग मिल एक में हेल्पर का काम करता था शनिवार को भी वह रोजाना की तरह काम कर रहा था तभी मशीन के पट्टे में उसका कान फंसा ओर वह लहूलुहान हो गया उसकी दर्दनाक मौत हो गई माना जा रहा है कि यदि हेल्पर तमाम सुरक्षा उपकरण पहनकर काम कर रहा होता तो संभवतः उसके साथ दर्दनाक हादसा न होता
इधर घटना की सूचना मिलते ही मृतक के शुभचिंतक ओर क्रांति सेना के सेनानी मौके पर पहुंचे और अपना आक्रोश व्यक्त किया देर रात तक फेक्ट्री के सामने धरना प्रदर्शन चलता रहा।
बुढ़ापे का इकलौता सहारा मां का रो रोकर बुरा हाल
मृतक पुष्पेंद्र साहू अपने मातापिता का बुढ़ापे का इकलौता सहारा था घटना की सूचना मिलते ही मौके पर परिजन पहुंचे अपने कलेजे के टुकड़े की मौत से मां का रो रोकर बुरा हाल देखा गया
आए दिन हादसे आकस्मिक निरीक्षण होता नहीं
उद्योगों में श्रमिकों के क्या हाल हैं सुरक्षा उपकरण दिए जा रहे या नहीं ओर यदि दिए भी जा रहे तो वह असली आईएसआई मार्का के हैं भी या नहीं श्रमिक सुरक्षा उपकरण के बिना काम तो नहीं कर रहे इस सब पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की पैनी नजर होनी चाहिए
जिस समय हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग में अविनाश गूंजाल उपसंचालक के पर पर थे उस समय उन्होंने कई फैक्ट्रियों में आकस्मिक निरीक्षण किया था जिससे खलबली मच गई थी लेकिन उद्योगपतियों की लंबी पहुंच के चलते उनका यहां से ट्रांसफर कर दिया गया था उसके बाद से आज तो किसी फेक्ट्री का आकस्मिक निरीक्षण हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने नहीं किया हालांकि इसके पीछे एक कारण यह भी बताया जाता हैं कि जैसे पूर्व में आकस्मिक निरीक्षण के अधिकार थे अब नहीं है