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बच्चो के धर्मांतरण और पहचान बदलने का मामला:: महिला बाल विकास विभाग की लापरवाही हुई उजागर

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बाल कल्याण समिति की निष्क्रियता भी आई सामने

रायसेन। गोहरगंज में 3 बच्चों के धर्मांतरण और उनके उनकी आईडेंटिटी बदलने को लेकर मचे बवाल के बीच महिला बाल विकास विभाग की लापरवाही उजागर हुई है ।महिला बाल विकास विभाग ने ना तो कभी शिशु बाल गृह का निरीक्षण किया न ही वहां रह रहे बच्चों से संवाद किया। जबकि नियमानुसार महिला बाल विकास विभाग को हर 3 माह में इस तरह के बाल ग्रहों का निरीक्षण करना चाहिए ।

यहां यह भी सवाल उठता है कि जिन बच्चों को बाल कल्याण समिति द्वारा जब गोहरगंज के इस शिशु बाल गृह में भेजा था तो इसके बाद बाल कल्याण समिति द्वारा इस बात की तस्दीक क्यों नहीं की गई कि उन बच्चों के की क्या दशा है। बताया जा रहा है कि महिला बाल विकास के विभाग के प अधिकारी न तो इस तरह के आकस्मिक निरीक्षण करते हैं और ना ही समय-समय पर अपने अधीनस्थों को निरीक्षण करने के निर्देश देते हैं। सवाल यह भी उठता है कि बच्चों की आईडेंटिटी और धर्म परिवर्तन करने के बाद गोहरगंज के बाल शिशु ग्रह पर आनन फानन कार्रवाई तो की जाएगी लेकिन महिला बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और बाल कल्याण समिति के सदस्यों पर क्या जवाबदेही तय होती है देखना यह है। हालांकि जितनी जवाबदारी शिशुबाल ग्रह की थी उतनी ही जवाब देही महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति की भी थी।

उल्लेखनीय है कि रायसेन का महिला बाल विकास विभाग इन दिनों सुर्खियों में है विगत 11 नवंबर को मुख्यमंत्री के सुल्तानपुर आगमन के दौरान कलेक्टर श्री अरविंद दुबे ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित कुछ आंगनबाड़ियों का निरीक्षण भी किया था इसी निरीक्षण के दौरान ग्राम चिलवाहा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र भी कलेक्टर पहुंचे थे और वहां का निरीक्षण किया था निरीक्षण के दौरान यह आंगनवाड़ी केंद्र करीब 10 दिनों से बंद था और कई दिनों से यहां पोषण आहार का वितरण भी नहीं हुआ था। कमोबेश जिले में महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर इसी तरह की स्थितियां है ना तो अधिकारी कभी इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर निरीक्षण के लिए जाते हैं ना ही उन्हें इससे सरोकार है की आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को पोषण आहार वितरित हो रहा है महिला बाल विकास विभाग सिर्फ जिला मुख्यालय पर कार्यक्रमों और समारोह में व्यस्त रहता है इस विभाग के अधिकांश अधिकारी जिला मुख्यालय पर ना रहकर भोपाल से आना-जाना करते हैं जिला प्रशासन को चाहिए कि वह महिला एवं बाल विकास विभाग की इस सब मामलों में रही भूमिका की भी जांच कराएं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

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