अयोध्या धाम मंदिर अंबाडी में केक काटकर मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी से गूंजा क्षेत्र
मंदिरों में देर रात तक भजन-कीर्तन और आरती, मटकी फोड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने लिया हिस्सा
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवानगंज सहित आसपास के करीब 40 गांवों में शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांवों के मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया था। शाम होते ही मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से जगमगा उठे। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही पूरा क्षेत्र ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा।
दीवानगंज, अंबाडी, सेमरा, नरखेड़ा, जमुनिया, निनोद, बरजोरपुर, सरार, बालमपुर और बेरखेड़ी चौराहा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। राधा-कृष्ण मंदिरों सहित विभिन्न मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के बाद पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण किया।
आधी रात को जन्मे कन्हैया, ढोल-नगाड़ों से गूंजा अंबाडी
अंबाडी स्थित अयोध्या धाम मंदिर में रात 12 बजते ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, जयकारों और आतिशबाजी से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने केक काटकर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया और नृत्य करते हुए खुशियां साझा कीं। चारों ओर ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘नंद के घर आनंद भयो’ के जयघोष सुनाई देते रहे।
मटकी फोड़ में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने दिखाया उत्साह
जन्माष्टमी के अवसर पर नई जगहों पर मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इसमें नन्हे बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्गों तक ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने मटकी फोड़ने के लिए जमकर प्रयास किए। मटकी फूटते ही कार्यक्रम स्थल पर तालियों और जयकारों की गूंज सुनाई दी। आयोजकों की ओर से मटकी फोड़ने वाले प्रतिभागियों को उपहार और पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया।
मंदिरों में एक साथ गूंज उठी आरती, आतिशबाजी से दीपावली जैसा नजारा
दीवानगंज के खेड़ापति हनुमान मंदिर, गुरुद्वारा मंदिर, राम जानकी मंदिर, इच्छापूर्ति हनुमान मंदिर सहित अंबाडी के अयोध्या धाम मंदिर, गणेश मंदिर, साहू मंदिर, शिव-पार्वती मंदिर और सेमरा के रेलवे स्टेशन मंदिर एवं गायत्री मंदिर में श्रद्धालुओं ने आरती की। जन्मोत्सव के बाद जगह-जगह आतिशबाजी की गई। रात में कई मंदिरों से एक साथ हुई आतिशबाजी के कारण पूरा क्षेत्र ऐसा नजर आया, मानो दीपावली का पर्व मनाया जा रहा हो।
सुंदरकांड, पूजा-अर्चना के बाद बांटा प्रसाद
जन्माष्टमी से पहले कई मंदिरों में सुंदरकांड का आयोजन किया गया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और आरती की गई। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कई मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को आकर्षक झूले में विराजमान कर श्रद्धालुओं ने उन्हें झुलाया।
घर-घर सजे राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप
जन्माष्टमी को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में भी खासा उत्साह रहा। कई परिवारों ने छोटे-छोटे बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में सजाया। बच्चों की आरती उतारकर पूजा की गई। नन्हे बच्चों के कृष्ण और राधा के रूप में सजे होने से घरों में भी उत्सव का माहौल बना रहा।
देर रात तक गूंजते रहे जयकारे
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद दीवानगंज और आसपास के ग्रामीण अंचल में देर रात तक भक्ति गीत, भजन-कीर्तन, जयकारे और आतिशबाजी का दौर चलता रहा। मंदिरों में श्रद्धालु देर रात तक मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र में ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘नंद के घर आनंद भयो’ के जयघोष गूंजते रहे। जन्माष्टमी ने पूरे ग्रामीण अंचल को एक रात के लिए भक्ति, उल्लास और कृष्णमय वातावरण में रंग दिया।