भोपाल मध्यप्रदेश के सहकारी कर्मचारियों की सरकार से बड़ी मांग,जब काम शासन का, तो वेतन-भत्तों में भेदभाव क्यों?
सी के पारे रायसेन
मध्यप्रदेश में लाखों सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लंबित प्रमोशन के मामलों को निपटाने और विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया नियमित रूप से शुरू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि अब यह प्रक्रिया हर साल नियमित रूप से आयोजित की जावेगी ताकि पात्र अधिकारीयों और कर्मचारियों को समय पर उनका हक मिले।
मंत्रालय में मंगलवार को आयोजित एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार कर्मचारियों को सभी देय वेतन भत्ते और प्रमोशन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और उनके परिवारों को खुशियां आती है तत्सबंध में सरकारी कर्मचारियों को उनका हक मिलना चाहिए परंतु सहकारिता के कर्मचारियों की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए सरकारी कर्मचारियों को भांति सहकारी कर्मचारी को सम्मान वेतन भत्ते प्रमोशन मिलना चाहिए। लेकिन इसी बीच सहकारिता विभाग के कर्मचारियों की आवाज भी सरकार तक पहुंचना जरूरी है।
सहकारी कर्मचारीयों को भी शासन की महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को जमीन पर संचालित करने में दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। PDS व्यवस्था, खाद वितरण, गेहूं खरीदी, किसानों से जुड़ी सहकारी गतिविधियां और शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में इन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
ऐसे में सहकारी कर्मचारियों का सवाल है कि जब जिम्मेदारियां इतनी महत्वपूर्ण हैं, तो उन्हें सम्मानजनक वेतन, भत्ते, प्रमोशन और अन्य कर्मचारी हितैषी सुविधाओं का लाभ सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर क्यों नहीं मिलना चाहिए?
महंगाई के इस दौर में सीमित वेतन में परिवार चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। आर्थिक दबाव के कारण कर्मचारियों में निराशा बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए सरकार को सहकारी कर्मचारियों की समस्याओं पर भी संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ विचार करना चाहिए।
सहकारी कर्मचारी भी आखिर इसी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनका भी सम्मान, सुरक्षित भविष्य और उचित वेतन उनका अधिकार है।सरकार से उम्मीद है कि सहकारी कर्मचारियों को भी सम्मानजनक वेतन-भत्ते, समयबद्ध प्रमोशन एवं कर्मचारी हितों से जुड़े उचित लाभ देने की दिशा में ठोस निर्णय लिया जाए।अब सवाल सिर्फ इतना है—सहकारी कर्मचारियों को उनका हक आखिर कब मिलेगा?