मनोज कुमार द्विवेदी ,अनूपपु्र
भारत मे अगस्त महीने मे अचानक शक्कर की कीमतों मे जबरदस्त बढोतरी देखी गयी। स्वतंत्रता दिवस की बूंदी की मिठास जीभ से होकर पेट तक पहुंची भी नहीं होगी कि शक्कर की कीमत मे उछाल ने आम जनता और सरका दोनों को चौंका दिया।
भारत मे रक्षा बंधन पर्व के साथ तीज – त्यौहार का मौसम शुरु हो जाता है। श्रावणी पर्व, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, पितृ पक्ष, नवरात्रि, दशहरा, दीपावली के साथ करवाचौथ, महालक्ष्मी व्रत, देव उठनी एकादशी जैसे छोटे – बडे पर्व बहुत से हैं । त्यौहार के ठीक पहले शक्कर की बढती कीमतों से आम जनता के मुंह का स्वाद कडवा हो गया है।
शक्कर आम परिवार की महत्वपूर्ण जरुरत है। हर व्यक्ति प्रतिदिन मिठाई , हलवा, खीर भले ना खाता हो , सुबह – शाम की चाय तो लगभग अधिकांश परिवारों की अनिवार्य आवश्यकता है। हमारे यहाँ मेहमानों का स्वागत् चाय से करने की परंपरा है। बिना शक्कर चाय की कल्पना नहीं की जा सकती।ऐसे मे केन्द्र और राज्य सरकारों के लिये शक्कर की बढती कीमत चिंता का विषय होना चाहिये।
एक अध्ययन के अनुसार भारत में चीनी का दाम अचानक बढ़ने के पीछे कोई एक कारण नहीं है।इसके पीछे अनेक कारण बतलाए जा रहे हैं । अनेक कारणों से जुलाई से अगस्त 2026 में दाम 48 रु से सीधा बढकर 55 — 60 रु किलो तक पहुंच गए हैं ।जबकि अनूपपुर जैसे मप्र – छग के सीमावर्ती जिले मे 70 रु फुटकर और 68 रू थोक का रेट बतलाया जा रहा है।
उत्पादन कम
कम बारिश और मौसम की गडबडी के कारण इस सीजन में शक्कर का उत्पादन अनुमान से बहुत कम रहा है। सरकार और ISMA को शुरू में 343 लाख टन उत्पादन की उम्मीद थी। लेकिन असल में इस सीजन में उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने की संभावना है। जबकि कुछ रिपोर्ट में 280 लाख टन तक बताया जा रहा है।यह भारत की सालाना खपत 280-290 लाख टन के बराबर ही है। इस साल 8 लाख टन शक्कर निर्यात किया गया है ।
इथेनॉल का सच
राजनैतिक और अलग – अलग कारणों से कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकांश चीनी इथेनॉल बनाने में चली गई। इसके कारण मे बाजार में शक्कर की कमी हो गयी।जबकि सरकार ने इसका खंडन किया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी, जो 2025-26 में घटकर 9% रह गई । देश का 75% इथेनॉल अब मक्का जैसे अनाज से बन रहा है। इसका यह मतलब हुआ कि इथेनॉल मुख्य कारण नहीं है ।लेकिन गन्ने के समर्थन मूल्य (FRP) में बढ़ोतरी और इथेनॉल पर जोर ने मिलों की लागत जरूर बढ़ाई है।
त्योहारी मांग और स्टॉक की कमी
अगस्त-सितंबर में रक्षाबंधन, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दिवाली की तैयारी शुरू होते ही मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, बिस्किट कंपनियों की मांग तेज हो जाती है। नया पेराई सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होगा, तब तक पुराने स्टॉक पर ही चलना है। स्टॉक कम होने की आशंका ने दाम और बढ़ा दिए।
जमाखोरी और सट्टेबाजी
खाद्य मंत्रालय ने खुद माना है कि कीमत बढ़ने में सट्टेबाजी और जमाखोरी भी एक बड़ा कारण है। थोक में भाव पिछले साल ₹3900 से बढ़कर ₹5500 प्रति क्विंटल के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है। इसीलिए सरकार ने आदेश दिया है कि महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले व्यापारी 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकते।
ग्लोबल कारण
ये समस्या सिर्फ भारत की नहीं है। 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय भाव 30 जून को $474/टन था जो 20 अगस्त को $552/टन हो गया – 16% उछाल।
सरकार क्या कर रही है?
कीमत काबू करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन (1 मिलियन टन) चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दे दी है, और जमाखोरी पर नजर रख रही है। आम जनता को हाल – फिलहाल शक्कर की बढती कीमतों से राहत मिलती नहीं दिख रही।
सरकार के लिये ये चिंता का विषय होना चाहिये।