कलेक्टर की जनसुनवाई में लगाई न्याय की गुहार
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची तहसील के ग्राम सेमरा के एक किसान को पटवारी की कथित लापरवाही भारी पड़ गई। मूंग फसल का समय पर पंजीयन नहीं होने के कारण किसान अब समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने से वंचित हो गया है।
किसान ने आरोप लगाया है कि कई बार अनुरोध करने के बावजूद संबंधित पटवारी ने पंजीयन नहीं किया, जिससे उसे एक लाख रुपये से अधिक के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। मामले को लेकर किसान ने तहसील, एसडीएम कार्यालय और जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम सेमरा निवासी किसान विक्की मीणा ने हल्का नंबर-7 के पटवारी सौरभ चौहान पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उसने ग्राम केमखेड़ी एवं सेमरा में करीब साढ़े सात एकड़ भूमि कोली पर लेकर मूंग की फसल बोई थी। समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के लिए आवश्यक फसल पंजीयन कराने वह कई बार पटवारी के पास पहुंचा, लेकिन हर बार उसे आश्वासन देकर लौटा दिया गया।
किसान का कहना है कि लगातार चक्कर लगाने के बावजूद पंजीयन नहीं किया गया और अंतिम तिथि निकल गई। परिणामस्वरूप उसका नाम पंजीकृत नहीं हो पाया। अब उसके पास लगभग 50 क्विंटल मूंग की उपज है, जिसे वह समर्थन मूल्य पर नहीं बेच सकेगा। खुले बाजार में समर्थन मूल्य से करीब 2 हजार रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत मिलने के कारण उसे एक लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में किसान ने कलेक्टर को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारी पर कार्रवाई करने तथा हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।
यह मामला अब ग्रामीण क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। किसानों का कहना है कि फसल पंजीयन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में लापरवाही सीधे किसानों की आय और आजीविका पर असर डालती है। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मामला बन सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसान को न्याय दिलाएगा और लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करेगा, या फिर किसान को अपने नुकसान का बोझ अकेले ही उठाना पड़ेगा?