सुरेंद्र जैन धरसीवां
नदी किनारे प्यासा गांव जी हां सुनने में जरूर ये अटपटा लग सकता है लेकिन खारुन नदी के किनारे बसे धरसींवा विधानसभा के पठारीडीह गांव की यही जमीनी सच्चाई है.
गंगरेल निकली जीवनदायिनी खारुन नदी जो राजधानी रायपुर के महादेव घांट से गुमा वाना पठारीडीह होते हुए सिमगा के समीप पर्यटन स्थल सोमनाथ धाम में शिवनाथ नदी में जाकर मिली है इस जीवन दायिनी नदी का जल कभी इतना स्वच्छ था कि नदी के पानी से जमीन की सतह स्पष्ट दिखाई देती थी ओर इस नदी के जल का उपयोग पीने ओर भोजन बनाने एवं निस्तारी आदि सभी कार्यों में होता था.

औद्योगिकीकरण के बाद उरला बोरझरा औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों का केमिकल युक्त पानी एवं शहर की गंदगी नदी में जाने से नदी का जल इतना प्रदूषित हो गया कि न तो वह निस्तारी के योग्य है न पीने के योग्य बचा.नदी के साथ साथ तटीय गांव का भूजल भी दूषित हो चुका है.पठारीडीह में हालात ये हैं कि नदी किनारे होने के बाबजूद ग्रामीण बूंद बूंद पानी को तरस रहे हैं .यह घर घर कनेक्शन की टोंटियां तो लगी हैं पर उनमें पानी नहीं आता.

भरी दोपहरी में पानी का टेंकर आते ही लाइन लगाकर पानी ले रही महिलाओं से बातचीत की तो उनका कहना था कि पानी की बहुत किल्लत है अंत गांव से टैंकर से पानी आता है वही पीते हैं.जनपद सदस्य प्रतिनिधि ईशर निषाद ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों के आने के बाद से ही स्थिति खराब होती चली गई ओर आज ये स्थिति बन चुकी है कि नदी का पानी भूजल सब खराब हो चुका है.औद्योगिक प्रदूषण का मुद्दा विधानसभा में भी विधायक उठाए लेकिन आज तक ग्रामीणों की किसी ने सुध नहीं ली है