सिर पर अपनी छत भी नहीं,पत्नी का हो चुका निधनसंतान नहीं, दूसरे के घर में रहकर गुजारा,सत्यापन पूरा होने के बाद भी नहीं मिला योजनाओं का लाभ
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के दावों के बीच रायसेन जिले के सांची विकासखंड की ग्राम पंचायत अंबाडी से एक मार्मिक मामला सामने आया है। यहां रहने वाले बेसहारा बुजुर्ग मंगल सिंह मोगिया पिछले तीन से चार महीने से वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलने के कारण दर-दर भटकने को मजबूर हैं। बढ़ती उम्र, कमजोर स्वास्थ्य और पैर में फ्रैक्चर होने के बावजूद वे हर दो-तीन दिन में करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगती है।
पत्नी के निधन के बाद मंगल सिंह पूरी तरह अकेले हो गए हैं। उनकी कोई संतान नहीं है और न ही सिर पर अपना घर। वे फिलहाल गांव के छोटे राम के मकान में रहकर किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। उम्र और बीमारी के कारण अब मजदूरी करना भी संभव नहीं है। ऐसे में वृद्धावस्था पेंशन ही उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा थी, लेकिन वह भी पिछले तीन महीने से बंद है।
मंगल सिंह ने बताया कि बैंक की पासबुक में जनवरी के बाद मार्च माह की पेंशन दर्ज है, इसके बाद अब तक कोई राशि उनके खाते में नहीं आई। उनका कहना है कि अब उनमें बार-बार बैंक जाने की ताकत भी नहीं बची है। पैर फैक्चर होने के कारण ज्यादा पैदल नहीं चल पाते हैं। लेकिन मजबूरी में फैक्ट्री चौराहे दीवानगंज तक जाना पड़ता है। वहीं पर बैंक स्थित है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए योजनाएं चला रही है, तो फिर पात्र हितग्राहियों को उनका अधिकार समय पर क्यों नहीं मिल रहा।
यह मामला सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर भी सवाल खड़ा करता है। एक ओर योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पात्र बुजुर्ग पेंशन और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। डिजिटल प्रक्रिया, सत्यापन और कागजी औपचारिकताओं के बीच ग्रामीण क्षेत्रों के कई बुजुर्ग अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल मंगल सिंह की नहीं, बल्कि क्षेत्र के कई पेंशनधारियों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं ग्राम पंचायत अंबाडी की सरपंच कुंती रमेश कुमार अहिरवार ने बताया कि सभी पेंशनधारियों का सत्यापन कराया जा रहा है। मंगल सिंह का सत्यापन पूरा हो चुका है तथा उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में भी शामिल कर दिया गया है। जैसे ही योजना की किस्त जारी होगी, उन्हें आवास का लाभ मिल जाएगा। पेंशन केंद्र सरकार द्वारा ही डाली जाती है ।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सत्यापन पूरा हो चुका है, तो फिर पात्र बुजुर्गों की पेंशन कब शुरू होगी और उन्हें योजनाओं का वास्तविक लाभ कब मिलेगा। स्थानीय लोगों की निगाहें अब जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में कितनी जल्द कार्रवाई कर जरूरतमंद बुजुर्गों को उनका अधिकार दिलाता है। दीवानगंज क्षेत्र के आसपास कई गांव के बुजुर्गों की भी यही स्थिति देखने में मिल रही है उनको भी कई महीनो से पेंशन नहीं मिल पा रही है।