राहुल गांधी का अब मध्यप्रदेश पर पूरी तरह फोकस
कांग्रेस संगठन की जमीनी ताकत को परखने की बड़ी कवायद
तारकेश्वर शर्मा
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में अगले महीने बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल सकता है।राहुल गांधी अब मध्यप्रदेश पर पूरी तरह फोकस करते दिखाई दे रहे हैं।
खबर है कि राहुल गांधी अगले महीने प्रदेश के दो बड़े संभाग उज्जैन और रीवा में विशाल जनसभाओं को संबोधित कर सकते हैं। इन सभाओं को सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन की जमीनी ताकत को परखने की बड़ी कवायद माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी इस दौरे के दौरान केवल मंच से भाषण देकर वापस नहीं लौटेंगे, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं, जिला अध्यक्षों और स्थानीय नेताओं से सीधे संवाद भी करेंगे। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान अब मध्यप्रदेश में संगठन की वास्तविक स्थिति जानना चाहता है। यही वजह है कि राहुल गांधी का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
उज्जैन और रीवा संभाग को चुनने के पीछे भी बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। उज्जैन संभाग मालवा क्षेत्र की राजनीति का केंद्र माना जाता है, जहां बीजेपी लंबे समय से मजबूत पकड़ बनाए हुए है। वहीं रीवा संभाग विंध्य क्षेत्र की राजनीति का अहम चेहरा है। कांग्रेस अब इन इलाकों में अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुट गई है। राहुल गांधी की सभाओं के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की रणनीति तैयार की जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी जिला अध्यक्षों से अलग-अलग बैठक कर संगठन की रिपोर्ट भी लेंगे। किन जिलों में कांग्रेस कमजोर है, कहां गुटबाजी ज्यादा है, किस क्षेत्र में कार्यकर्ता निष्क्रिय हैं और किन मुद्दों पर जनता नाराज है — इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत फीडबैक लिया जाएगा। माना जा रहा है कि राहुल गांधी सीधे जमीनी नेताओं की राय सुनकर आगामी रणनीति तय करेंगे।
कांग्रेस के अंदर भी इस दौरे को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी कार्यकर्ताओं को सभाओं में बड़ी भीड़ जुटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। कई जिलों में तैयारी बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। पार्टी नेताओं का मानना है कि अगर राहुल गांधी का दौरा सफल रहता है तो इससे प्रदेश में कांग्रेस को नई ऊर्जा मिल सकती है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो मध्यप्रदेश कांग्रेस पिछले कुछ समय से संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। कई जगहों पर स्थानीय स्तर पर तालमेल की कमी देखने को मिली है। ऐसे में राहुल गांधी का सीधे कार्यकर्ताओं से संवाद करना संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
बीजेपी भी राहुल गांधी के इस संभावित दौरे पर नजर बनाए हुए है। क्योंकि मध्यप्रदेश हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में कांग्रेस अगर यहां अपनी पकड़ मजबूत करती है तो उसका असर आने वाले चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।
राहुल गांधी की सभाओं में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याएं, युवाओं के मुद्दे और प्रदेश की राजनीतिक स्थिति प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं। कांग्रेस इन जनसभाओं के जरिए जनता तक यह संदेश पहुंचाना चाहती है कि पार्टी अब मैदान में पूरी ताकत के साथ उतर चुकी है।
उधर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी का यह दौरा केवल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि यह संगठन की असली परीक्षा भी साबित होगा। क्योंकि हाईकमान अब केवल रिपोर्ट के भरोसे नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीन की वास्तविक तस्वीर खुद देखना चाहता है।
अब सबकी नजर राहुल गांधी के मध्यप्रदेश दौरे पर टिक गई है। क्या कांग्रेस इन सभाओं के जरिए प्रदेश में नया माहौल बना पाएगी? क्या कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकी जा सकेगी? और क्या बीजेपी के मजबूत गढ़ में कांग्रेस नई चुनौती पेश कर पाएगी?इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की राजनीति तय करेगी।