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जिले में नरवाई में आग लगाने पर धारा 163 के तहत प्रतिबंध

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 रुपेश मेहरा बरेली रायसेन 

जिले में जनसामान्य के हित, सार्वजनिक सम्पत्ति, पर्यावरण एवं लोक व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी अरूण कुमार विश्वकर्मा के निर्देशानुसार अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी श्री मनोज उपाध्याय द्वारा सम्पूर्ण जिले की भौगोलिक सीमा में खेत में खड़े गेहूॅ के डंठलों (नरवाई) में आग लगाने पर तत्काल प्रभाव से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 अंतर्गत धारा 163 के तहत तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध आगामी दो माह तक जिले की सम्पूर्ण राजस्व सीमा में प्रभावशील रहेगा। इस आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के अंतर्गत दण्डनीय होगा।
उल्लेखनीय है कि जिले की राजस्व सीमा में गेहूॅ की फसल की कटाई के पश्चात अगली फसल के लिए खेत तैयार करने के लिए बहुसंख्यक किसानों द्वारा अपनी सुविधा के लिए खेत में आग लगाकर गेहूॅ के डंठलों को नष्ट कर खेत साफ किया जाता है। आग लगाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसे नरवाई में आग लगाने की प्रथा के नाम से भी जाना जाता है। जिले में खलियानों से गुजर रही बिजली लाईनों पर कुछ कृषकों द्वारा अवैध वायर अथवा तार लगाकर बिजली का उपयोग किए जाने से तारों से स्पार्किंग होने से भी कई बार फसलों में आगजनी की घटनाएं घटित होने की संभावना बनी रहती है।
नरवाई में आग लगाना खेती के लिये नुकसानदायक होने के साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी हानिकारक है। इसके कारण विगत वर्षो में गंभीर अग्नि दुर्घटनाएं घटित हुई हैं तथा व्यापक सम्पत्ति की हानि हुई है। साथ ही बढ़ते जल संकट में इससे बढ़ोत्री तो होती ही है, साथ ही कानून व्यवस्था के लिए भी विपरीत स्थितियां निर्मित होती है। खेत की आग के अनियंत्रित होने पर जनसम्पत्ति व प्राकृतिक वनस्पति, जीव-जन्तु आदि नष्ट हो जाते हैं। साथ ही खेत की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु इससे नष्ट होते हैं जिससे खेत की उर्वरा शक्ति भी धीरे-धीरे घट रही है और उत्पादन प्रभावित हो रहा है। नरवाई जलाने से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन होता है जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। यदि फसल अवशेषों, नरवाई को एकत्र कर जैविक खाद जैसे भू-नाडेप वर्मी कम्पोस्ट आदि बनाने में उपयोग किया जाए तो यह बहुत जल्दी सड़कर पोषक तत्वों से भरपूर खाद बना सकते है। इसके अतिरिक्त खेत में कल्टीवेटर, रोटावेटर की सहायता से फसल अवशेषों को भूमि में मिलाने से आने वाली फसलों में जीवांश के रूप में बचत की जा सकती है।

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