गैरतगंज: जांच के नाम पर ‘खानापूर्ति’ कर लौटा एमपीआरडीसी का अमला; घटिया निर्माण पर पर्दा डालने की कोशिश
मीडिया की खबरों के बाद जागी कुंभकर्णी नींद
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले के गैरतगंज नगर में करोड़ों की लागत से हो रहे सड़क चौड़ीकरण के कार्य में व्याप्त भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की शिकायतों के बाद गुरुवार को एमपीआरडीसी का अमला जांच करने पहुंचा। लेकिन यह जांच महज एक कागजी औपचारिकता और दिखावा ही साबित हुई। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने न केवल नागरिकों की गंभीर शिकायतों को दरकिनार किया, बल्कि ठेकेदार की खामियों पर पर्दा डालते हुए नज़र आये।
सड़क निर्माण में गैर-तकनीकी खामियों और घटिया सामग्री के उपयोग की खबरों के बाद एमपीआरडीसी के एजीएम आरएस कीर अपनी टीम के साथ गैरतगंज पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जांच दल ने पूरी तरह से ‘फिक्स्ड’ तरीके से काम किया। निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों से इंचीटेप मंगाकर कुछ जगहों पर नपाई की रस्म निभाई गई। स्थानीय लोगों ने जब घटिया गुणवत्ता से बन रही नालियों की ओर ध्यान दिलाया, तो अधिकारियों ने उन्हें दूर से ही देखकर ‘इतिश्री’ कर ली।

ठेकेदार की मेजबानी और शाही दावत
हैरत की बात तो यह रही कि जांच करने आए अधिकारी ही जांच के दायरे में आने वाले ठेकेदार के मेहमान बन गए। निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति करने के बाद पूरा जांच दल ठेकेदार के कर्मचारियों के साथ नगर के एक शाही होटल पहुंचा, जहां उन्होंने लाजवाब पकवानों का आनंद लिया। इस दृश्य ने अधिकारियों की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों ने जब अधिकारियों से जांच के नतीजों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली और कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। अधिकारियों के इस व्यवहार से स्थानीय रहवासियों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है।

ठंडे बस्ते में पुरानी जांचें, नगरवासी परेशान
यह पहली बार नहीं है जब इस सड़क निर्माण की शिकायत हुई हो।पूर्व में भी नालियों के धराशायी होने, सड़क में गड्ढे पड़ने और निर्धारित चौड़ाई कम करने की शिकायतें हुई थीं। निर्माण एजेंसी दोषी भी पाई गई, लेकिन विभागीय मिलीभगत के चलते हर बार जांच रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नगरवासियों के नसीब में एक ऐसी घटिया सड़क आ रही है जो भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं और असुविधाओं का केंद्र बनेगी।
इनका कहना है
“हमने निर्माण कार्य की जांच की है। इसका विस्तृत प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा जाएगा। इसके बाद ही कोई कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।”
आरएस कीर, एजीएम, एमपीआरडीसी