देवेन्द्र तिवारी सांची रायसेन
स्तूप परिसर मे कुत्ते बेधड़क घूमते दिखाई दे जाते हैं कडी सुरक्षा के बावजूद इन कुत्तों पर लगाम लगाने पुरातत्व प्रशासन पूरी तरह असफल साबित हो चुका है इन कुत्तों मे कौन पालतू हैं कौन से कुत्ते पागल हैं कहना मुश्किल रहता हैं कभी भी किसी देशी विदेशी पर्यटक के साथ कुत्तों के हमला करने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार स्तूप परिसर को एक संवेदनशील क्षेत्र की श्रेणी मे गिना जाता है जिससे यहां की सुरक्षा व्यवस्था भी कडी रहती है इस स्तूप परिसर मे ढाई हजार साल प्राचीन स्मारकों के दर्शनार्थ यहां देशी विदेशी पर्यटक आते जाते रहते हैं इनमे महिला पुरुषों बच्चों की संख्या भी खासी रहती हैं तथा इन स्मारकों के दर्शनार्थ पर्यटकों को टिकट लेकर जाना पडता है परन्तु इस क्षेत्र मे आवारा कुत्तों का साम्राज्य बन चुका है हालांकि इस क्षेत्र की सुरक्षा कडी एवं चौकस रहती है इसलिये कहा जाता है इस क्षेत्र मे परिंदा भी पर नही मार सकता ।इस क्षेत्र की सुरक्षा मे सुरक्षा कर्मी तो बडी संख्या मे रहते ही हैं इसके साथ ही पुरातत्व विभाग के टिकट घर से ही यहां आने जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने जगह जगह कैमरे लगाये गए हैं इस स्थिति मे पूरा क्षेत्र कैमरों की निगरानी मे रहता है परन्तु यहाँ घूमने वाले कुत्ते न तो कैमरों की कैद मे ही आ पाते हैं न ही सुरक्षा कर्मियों की ही नजर पहुंच पाती है तथा मुख्य द्वार सहित पूरे परिसर मे कुत्ते बेफिक्र होकर यहां वहां घूमते फिरते हैं तथा पर्यटकों के आगे पीछे भी घूमते दिखाई दे जाते हैं जिससे पर्यटकों मे भय बढ जाता हैं ।वैसे भी इस क्षेत्र मे आवारा रूप से घूमने वाले कुत्तों मे यह परख पाना मुश्किल होता है कि कौन से कुत्ते पालतू हैं तथा इनमे कौन से कुत्ते पागल रहते हैं यह बता पाना मुश्किल होता है कभी कभी तो यह कुत्ते पर्यटकों के ऊपर ही भोंकना शुरू कर देते है दूसरी ओर बंदर का जमघट लगा रहता है जगह जगह बंदरों को भी आसानी से देखा जाता हैं ऐसा भी नही है कि इन पशुओं की करतूतों से पुरातत्व विभाग प्रशासन बेखबर हो ।यहां तक कि स्तूप प्रशासन के कार्यालय के समीप भी बेफिक्र होकर कुत्ते नींद लेते दिख जाते हैं ।तब विभाग अपनी आय टिकट के रूप मे कर लेता हैं बावजूद इसके यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा से बेफिक्र बना दिखाई देता है तब इन काटने वाले पशुओं से कभी किसी पर्यटक के साथ कोई घटना घट जाती है तब सवाल खडा होता है इसकी जिम्मेदारी कौन उठायेगा ।इतनी बडी कैमरे सहित सुरक्षा कर्मियों के होते हुए बेफिक्र होकर कुत्तों का परिसर मे विचरण करना स्तूप प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर रहा है।