हैंडपंप में भी पानी की कमी:कैसे करें खेती
रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह
वर्षो से जल संकट से जूझ रहे गांव गीदन में पहले निजी और अब जन प्रतिनिधि के माध्यम से पहुंचने वाला वाटर टैंकर ही यहां के लोगों को विकास प्रतीत होता होगा, क्योंकि ये पहले नाले के पानी पर निर्भर थे।स्थानीय जिम्मेदार भी यहां भूमिगत जलस्तर की कमी बता कर इतिश्री कर लेते होंगे जिसका फायदा निजी क्षेत्र वाले सेवा की आड़ में मुनाफा तलाश रहे होंगे,आश्चर्य यह है कि साल दर साल बीतते गए पर योजनाबद्ध तरीके से विकास नहीं हुआ!
जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर बटियागढ तहसील की ग्राम पंचायत शहजादपुरा के अंतर्गत आने वाला गांव गीदन पिछले कई वर्षो से पानी की कमी के कारण विकास से कोसों दूर नजर आता है जिसका समाधान अब तक नहीं हुआ,करीब 500 की जनसंख्या वाले इस गांव के अधिकतर लोग मजदूर या श्रमिक है जो पानी की कमी के कारण कृषि कार्यों से भी वंचित प्रतीत होते है।

स्कूल भवन को मरम्मत की जरूरत
वैसे तो इस गांव में अन्य समस्याएं भी है पर आय और रोजगार की कम उपलब्ध के कारण जरूरतमंद लोगों की संख्या ज्यादा है। यहां के एकीकृत स्कूल में करीब 82 छात्र दर्ज है जहां तीन नियमित शिक्षक और दो अतिथि शिक्षक पदस्थ है पर स्कूल का भवन जर्जर हो चला है दीवारों पर दरारें आसानी से देखी जा जाती है। शिक्षक रामस्वरूप ने बताया कि रिपेयरिंग की राशि नहीं आई। बाउंड्री वॉल भी नहीं है,भवन कमजोर है और पुताई भी नहीं हुई है।

अस्पताल,बाजार 10 -12 किमी दूर
गीदन के ग्रामीणों को अस्पताल और बाजार जाने के लिए करीब 10 – 12 किमी की यात्रा करना पड़ती है। आय के साधन न होने के कारण आस पास मजदूरी करने भी जाते है ग्रामीण सुंदर बताते है कि यहां भूमिगत जलस्तर काफी नीचे है हैंडपंप लगाए गए पर पानी नहीं है। पिछले पांच छह वर्षो से दिन में दो बार एक निजी व्यक्ति के द्वारा पानी का टैंकर भेजा जाता है एक परिवार को सिर्फ पांच डिब्बे पानी मिलता है उसमें ही गुजारा करना पड़ता है,करीब डेढ़ किमी दूर एक नाला है जिसके पानी का इस्तेमाल भी किया जाता है मवेशी उसी नाले पर निर्भर है परंतु वहां भी जंगली जानवरों का भय बना रहता है। गांव में एक तालाब का निर्माण कार्य चल रहा है जिसमें अधिकतर काम मशीनों से हुआ है अब तक यहां करीब 6 कुटीर बन पाई है।

ग्रामीणों का झलका दर्द
हीरा सिंह,जानकी, नोने सिंह,भूरा सिंह,गोकुल ने बताया कि सिर्फ बारिश की फसल ले पाते है,साल भर पानी नहीं रहता,छोटी छोटी तलैया है वे सूख जाती है,करीब डेढ़ किमी दूर नाला है गर्मी के समय उसमें भी पानी नही रहता,गड्ढे में पानी बचता है उसी का इस्तेमाल करते है। वहां भी जंगली जानवरों का भय बना रहता है।पांच छह साल से टैंकर आ रहे है उससे भी पांच डिब्बे पानी मिलता है थोड़ा थोड़ा करके गुजारा बस चल रहा है।
आश्चर्य यह है कि पिछले कई सालों से यहां पानी के लिए लोग जद्दोजहद कर रहे है पर इनके लिए कोई स्थाई समाधान अब तक दिखाई नहीं देता। वर्तमान में भी यहां पर परकोलेशन,तालाब बनते दिखाई देते है पर वे कितने सफल होंगे ये तो समय बताएगा पर तरक्की के नाम पर तो वर्तमान में यहां आने वाला पानी का टैंकर ही विकास है।

“गीदन जैसे छोटे गांव में दो तीन बार गया,पानी की समस्या बताई, तो दो- तीन बोर करवाए,पानी की कमी थी पर इतना था कि काम चल रहा था,इसका रिकॉर्ड निकलवा कर देख सकते है। अब थोड़ा समय लगेगा पर जल जीवन मिशन का पानी जाएगा”
लखन पटेल पूर्व विधायक,(भाजपा)पथरिया विधानसभा
“भोपाल में विषय रखा गया।आपने व्यक्तिगत संज्ञान में मामला दिया है जरुर दिखवाएंगे,नाले में अगर स्टॉप डैम का सोर्स बनेगा तो प्राथमिकता से करवाएंगे। योजनाएं हमेशा योजनाबद्ध होना चाहिए,अन्य कार्यों में अगर गुणवत्ता की कमी दिखाई देगी तो उसे भी दिखवाएंगे”
गौरव पटेल,प्रतिनिधि अध्यक्ष,जिला पंचायत,दमोह एवं भूतपूर्व कांग्रेस प्रत्याशी,पथरिया विधानसभा
“नवीन नल कूप खनन और हैंडपंप स्थापना कार्य प्रस्तावित कर दिया है सर्वे करवाएंगे,सफल होगा तभी करवाएंगे।समूह नल जल योजना से जोड़ना है आने वाले दिनों में लाभ मिल जाएगा।
एस भूषण सब इंजीनियर,लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग,दमोह