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भारतीय संस्कृति को बचाना हम सबका दायित्व: हजारी

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रिपोर्ट देवेश पाण्डेय सिलवानी रायसेन

भारतीय संस्कृति पर लगातार हमले होते रहे है और वर्तमान में भी हम भारतीय संस्कृति को मुक्त नहीं कर पाये है। आज भी हरी लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति से मुक्त नहीं हुए है। आज की युवा पीढ़ी को आज की नई टेक्नोलाॅजी के साथ भारतीय संस्कृति का ज्ञान कराना भी आवश्यक है।
उक्ताशय के उद्गार भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के भोपाल संभाग प्रभारी आर.पी. हजारी ने ग्राम सांईखेड़ा के रायश्री गार्डन में आयोजित अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वाधान में आयोजित भारतीय संस्कृति शिक्षक सेमीनार में व्यक्त किये।
कार्यक्रम के प्रारंभ में गायत्री प्रज्ञा मंडल द्वारा गायत्री यज्ञ का आयोजन किया गया एवं दैहिक भौतिक तापों के समन हेतु प्रतिदिन अपने घरों में यज्ञ करना चाहिये। पर्यावरण के संरक्षण में यज्ञ का काफी योगदान रहता है। कार्यक्रम में जिला प्रभारी डाॅ. बी.पी. गुप्ता ने गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। गुरूदेव ने 15 साल की उम्र से ही साधना में लग गये थे, उन्होनें अपने जीवन काल में लगभग 2400 पुस्तकों का लेखन किया है। उन्होने कहाकि अच्छे कर्म करने की इच्छा यदि मन में है तो हर उम्र में इंसान युवा रहता है। अच्छे कार्य करने की कोई उम्र नहीं होती है।
आर.पी. हजारी ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का औचित्य और वर्तमान आवश्यकता बताते हुये कहाकि आज की युवा पीढ़ी को संस्कृति का ज्ञान नहीं है। वह पाश्चात्य सभ्यता की अंधी दौड़ में अपनी संस्कृति भूल गई है। भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। कई संस्कृतियों का उदय हुआ और नष्ट हो गई लेकिन भारतीय संस्कृति आज भी गतिमान है। विश्व में मानव जाति की उत्पत्ति अखंड भारत के हिमालय से हुई है। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का कार्य आध्यात्म और विज्ञान को मिलाना है। हजारों वर्षो की गुलामी से हम तो आजाद हो गये परंतु हमारी संस्कृति अभी आजाद नहीं हुई है।
उन्होनें कहाकि गायत्री परिवार द्वारा इस वर्ष पूरे भारत में एक साथ 5 नंबवर को विभिन्न कक्षाओं की भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक कक्षा के लिए अलग अलग साहित्य दिया जाएगा एवं प्रतियोगियों को तहसील, जिला, संभाग एवं राज्य स्तर से लेकर राष्टीय स्तर तक पुरूष्कृत किया जावेगा। परीक्षा शुल्क नाम मात्र 25 से 40 रूपये अलग अलग कक्षाओं के लिये निर्धारित किया गया है। गायत्री परिवार का कार्य पैसा कमाना नही अपितु भारतीय संस्कृति से युवा पीढ़ी को अवगत कराना है। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपने विद्यालय में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में अधिक से अधिक बच्चों को सम्मिलित करने का आग्रह किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, गायत्री परिजन उपस्थित रहे।

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