विनोद कुमार साहू बाड़ी रायसेन
शहर के मुस्लिम समाज में इन दिनों एक अहम मसले को लेकर पैदा हुई गलतफ़हमियों पर आखिरकार तस्वीर साफ़ होती दिखाई दी। एक पक्ष जहाँ प्रशासन को अपनी बात से मुतास्सिर कर गुमराह करने में कामयाब रहा, वहीं इस पूरे मामले पर मसाजिद कमेटी के सचिव द्वारा लिखे गए पत्र ने हक़ीक़त को वाज़ेह करते हुए विवाद पर लगभग पटाक्षेप कर दिया।
दरअसल, इस मसले में स्थानीय मुस्लिम समाज के भीतर दो अलग-अलग दावेदार सामने आ गए थे और हैरत की बात यह रही कि दोनों पक्षों के पास भोपाल स्थित मुस्लिम त्योहार कमेटी के पत्र मौजूद थे। यही वजह रही कि मामला महज़ अंदरूनी मतभेद तक सीमित न रहकर प्रशासनिक हलकों तक जा पहुँचा।
विवाद उस वक़्त खुलकर सामने आया जब शांति समिति की बैठक में एक पक्ष ने शहरकाज़ी जनाब तैय्यब हाशमी साहब से ईद की नमाज़ अदा कराने की बात रखी। मगर दूसरे पक्ष ने इस प्रस्ताव को सिरे से ख़ारिज करते हुए साफ़ कहा कि ईदगाह और मस्जिद से जुड़ी व्यवस्थाएँ मस्जिद कमेटी के दायरे और ज़िम्मेदारी में आती हैं, न कि मुस्लिम त्योहार कमेटी के।
शहर के वरिष्ठ मुस्लिम समाजसेवी जनाब इरफ़ान दुर्रानी ने भी इस पूरे मामले में आपसी एहतिराम, अमन और इत्तेहाद को बरक़रार रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि दीन के मसाइल को आपसी मशवरे, तहम्मुल और हिकमत के साथ हल किया जाना चाहिए ताकि समाज में किसी तरह की गलतफ़हमी या इंतिशार पैदा न हो।
मुस्लिम समाज के समझदार तबक़े का मानना है कि ऐसे नाज़ुक मामलों में व्यक्तिगत अहम से ऊपर उठकर शहर के अमन, भाईचारे और दीनी रवायतों की हिफ़ाज़त को तरजीह दी जानी चाहिए।