200 वर्ष पुरानी परंपरा में 400 से अधिक महिलाओं का हल्दी-कुंकू समारोह, सुहाग सामग्री देकर किया जाता है सम्मान
रजनी खेतान इंदौर
सिल्वर स्प्रिंग्स फेज-1 में निवासरत खोत परिवार द्वारा पिछले 48 वर्षों से अपने निवास पर श्री महालक्ष्मी माता की स्थापना कर महाराष्ट्र की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को निरंतर जीवंत रखा जा रहा है। महालक्ष्मी पर्व के अवसर पर परिवार द्वारा विधि-विधान एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता की पूजा-अर्चना की जाती है। यह आयोजन परिवार के लिए आस्था के साथ-साथ पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

खोत परिवार में श्री महालक्ष्मी माता के ज्येष्ठा एवं कनिष्ठा स्वरूपों की स्थापना की जाती है। विशेष बात यह है कि माता के साथ उनके पुत्र एवं पुत्री के पारंपरिक मुखौटों का उपयोग भी किया जाता है। परिवार के अनुसार, इन मुखौटों की परंपरा लगभग 200 वर्षों पुरानी है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन्हें महालक्ष्मी पर्व की स्थापना में उपयोग किया जाता रहा है। इस ऐतिहासिक पारिवारिक परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

महालक्ष्मी पर्व के दौरान पुष्पा सुनील खोत परिवार द्वारा महिलाओं के लिए विशेष हल्दी-कुंकू समारोह का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर 400 से अधिक महिलाओं को माता लक्ष्मी का स्वरूप मानकर उनका पारंपरिक रूप से स्वागत एवं सम्मान किया जाता है। महिलाओं को हल्दी-कुंकू लगाने के साथ सुहाग सामग्री भेंट की जाती है तथा उनके सुख, सौभाग्य, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की जाती है। बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता इस आयोजन को विशेष बना देती है।
इस पारंपरिक आयोजन की तैयारियां भी कुछ दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। महालक्ष्मी पर्व से दो दिन पूर्व महिलाओं के लिए विशेष मेहंदी कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसमें महिलाएं उत्साहपूर्वक शामिल होती हैं। मेहंदी, हल्दी-कुंकू और सुहाग सामग्री की परंपरा के माध्यम से महाराष्ट्रियन संस्कृति की पारंपरिक छटा देखने को मिलती है।

खोत परिवार का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ नारी सम्मान, सौभाग्य और सामाजिक सहभागिता का भी संदेश देता है। बदलते समय के साथ भी परिवार द्वारा अपनी पुरानी परंपराओं को संजोकर रखना और नई पीढ़ी को उनसे जोड़ना भारतीय संस्कृति और पारिवारिक विरासत के संरक्षण का सुंदर उदाहरण है।
महालक्ष्मी पर्व के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय एवं उत्सवमय हो जाता है। पारंपरिक पूजा, महिलाओं की सहभागिता, हल्दी-कुंकू, मेहंदी और सुहाग सामग्री वितरण के माध्यम से खोत परिवार महाराष्ट्र की लगभग दो शताब्दियों पुरानी पारिवारिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।