सागर। दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन भाग्योदय तीर्थ में मुनिश्री चंद्रसागर महाराज ने कहा कि क्षमा आत्मा का स्वभाव है, जबकि क्रोध पतन का कारण है। क्षमा मनुष्य को जोड़ती है और क्रोध संबंधों को तोड़ता है। क्षमा से बिगड़े कार्य सुधरते हैं और आत्मा का उत्थान होता है। आत्मकल्याण के लिए वाणी, व्यवहार और भावों में संयम आवश्यक है। क्षमा अहिंसा और शांति का मार्ग दिखाती है। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में क्षमा का अभ्यास करना चाहिए।
मुनिश्री उद्यमसागर महाराज ने कहा कि दशलक्षण पर्व के दौरान मुनिराजों की चर्या के अनुरूप जीवन जीने का प्रयास करें। ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सामायिक, प्रतिक्रमण, अभिषेक-पूजन और विधान करें। नशामुक्ति, संयमित आहार, सादगी और ब्रह्मचर्य का पालन करें। धर्म आत्मावलोकन का अवसर देता है। आत्मकल्याण के लिए भाग्य नहीं, पुरुषार्थ आवश्यक है। उत्तम क्षमा के लिए केवल निर्मल भावों की आवश्यकता होती है।
दशलक्षण पर्व प्रारंभ आज उत्तम मार्दव धर्म पर कार्यक्रम।
जैन धर्म के दशलक्षण पर्व ऋषि पंचमी 16 सितंबर से प्रारंभ हो गए लंबे समय बाद सागर में चार मुनि संघ का सानिध्य मिलने से धर्मालंबियों में खुशी की लहर है। पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म पर सभी मुनिराज ने प्रवचन दिए। और लोगों से आह्वान किया कि क्षमा धर्म आपके जीवन में है तो आने वाले नौ धर्म को आप अपने जीवन में उतार सकते हैं क्षमा अंतरंग से होना चाहिए वाहिरंग से नहीं।

मुकेश जैन ढाना ने बताया कि भाग्योदय तीर्थ, वर्धमान कॉलोनी, गौराबाई जैन मंदिर कटरा और सुभाष नगर जैन मंदिर में भक्ति भाव से मुनि संघों के सानिध्य में कार्यक्रम प्रारंभ सुबह 6:30 बजे से अभिषेक शांतिधारा के बाद दशलक्षण पर्व पर होने वाली सभी पूजाएं श्रावको ने की सभी जैन मंदिरों में शांति धारा के लिए बढ़ चढकर लोगों ने बोलियां लगाई सभी मंदिरों में लाइटिंग की व्यवस्था की गई है और प्रतिदिन रात में सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रम हो रहे हैं कटरा बाजार में आचार्य विभव सागर महाराज के सानिध्य में दशलक्षण पर्व पर शिविर का आयोजन हो रहा है जिसमें लगभग 200 से अधिक शिविरार्थी शामिल है। पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर कार्यक्रम होंगे।
