जलाशय की सतह पर बिछी हरी चादर, पानी की गुणवत्ता और जलीय जीवन को खतरा; प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान की मांग
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
रायसेन और विदिशा जिले की साझा पहचान और प्रमुख पर्यटन स्थल हलाली डैम इन दिनों तेजी से फैल रही जलकुंभी की समस्या से जूझ रहा है। जलाशय के कई हिस्सों में जलकुंभी ने पानी की सतह को ढक लिया है, जिससे डैम का प्राकृतिक सौंदर्य प्रभावित होने के साथ ही जल पर्यावरण को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलकुंभी पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में इसका असर पर्यटन, सिंचाई और जल गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
नीले पानी की जगह दिखाई दे रही हरी चादर
बारिश के मौसम में हलाली डैम की हरियाली और जलराशि पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन इस बार कई हिस्सों में पानी की सतह पर फैली जलकुंभी ने नजारा बदल दिया है। लगातार फैल रही जलकुंभी से जलाशय का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। पानी की सतह ढकने से सूर्य का प्रकाश और हवा पानी के भीतर कम पहुंचने की आशंका है, जिसका असर जलीय पारिस्थितिकी और मछलियों सहित अन्य जलीय जीवों पर पड़ सकता है।
सिंचाई और पर्यटन दोनों पर असर की आशंका
हलाली डैम आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है। ऐसे में जलकुंभी का लगातार बढ़ता फैलाव चिंता का विषय बन गया है। दूसरी ओर, डैम की प्राकृतिक खूबसूरती देखने पहुंचने वाले पर्यटकों को भी पहले जैसा नजारा नहीं मिल रहा। जलकुंभी का फैलाव बढ़ा तो बोटिंग और अन्य पर्यटन गतिविधियों में भी परेशानी बढ़ सकती है।
लंबे समय से सफाई की जरूरत, अब बड़े अभियान की मांग
स्थानीय लोगों के अनुसार जलकुंभी की समस्या नई नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ते फैलाव के बावजूद प्रभावी स्तर पर सफाई और रोकथाम नहीं होने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। लोगों ने रायसेन और विदिशा जिला प्रशासन तथा जल संसाधन विभाग से डैम का तत्काल निरीक्षण कराने, जलकुंभी की स्थिति का सर्वे करने और मशीनों के माध्यम से बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाने की मांग की है।

स्थायी समाधान नहीं हुआ तो हर साल बढ़ेगी समस्या
लोगों का कहना है कि केवल जलकुंभी हटाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके दोबारा फैलने के कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन कर नियमित निगरानी और स्थायी रोकथाम की व्यवस्था करनी होगी। हलाली डैम केवल जलाशय नहीं, बल्कि क्षेत्र की सिंचाई, पर्यावरण और पर्यटन से जुड़ी महत्वपूर्ण पहचान है।
ब्रज भूषण शर्मा ने कहा कि “हलाली डैम हमारे क्षेत्र की लाइफलाइन है। जलकुंभी जिस तेजी से फैल रही है, उससे पानी और पर्यावरण को नुकसान होने की चिंता है। प्रशासन को तत्काल सफाई अभियान शुरू कर स्थायी समाधान निकालना चाहिए।”
भोपाल के पर्यटक सौरभ साहू ने कहा कि “हम परिवार और दोस्तों के साथ प्राकृतिक खूबसूरती देखने यहां आते हैं, लेकिन इस बार जलकुंभी के कारण डैम का नजारा काफी प्रभावित नजर आया। समय पर सफाई नहीं हुई तो पर्यटकों की संख्या पर भी असर पड़ सकता है।”
प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती
हलाली डैम में बढ़ती जलकुंभी अब केवल सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं रह गई है। इसके बढ़ते फैलाव ने जल गुणवत्ता, जलीय पर्यावरण, पर्यटन और जल संसाधन प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल विशेषज्ञों की मदद से सर्वे कराकर जलकुंभी हटाने की कार्ययोजना तैयार करे और नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
आधिकारिक बयान
इस समय हलाली डैम 70% भर चुका है जिससे 14 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो रही है। विदिशा और रायसेन को पीने के लिए पानी भी पहुंच रहा है। वही बेरसिया, विदिशा ,भोपाल, रायसेन सहित कई पर्यटक डैम को निहारने के लिए पहुंच रहे हैं। डैम में धीरे-धीरे पानी का जलस्तर बढ़ रहा है।
बीके बागुल्या अनुविभागीय अधिकारी हलाली डैम