मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवानगंज, बालमपुर, बैरखेड़ी और सलामतपुर सहित आसपास के गांवों में बढ़ीं घटनाएं, सांस लेने में परेशानी; कलेक्टर की अपील के बाद भी नहीं थम रहा सिलसिला दीवानगंज। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक और जिला प्रशासन की अपील के बावजूद सांची विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। धान की कटाई के बाद दीवानगंज, बालमपुर, बैरखेड़ी, सलामतपुर, ढकना-चपना और मुक्तापुर सहित आसपास के गांवों में किसान खेतों में बचे फसल अवशेषों को आग के हवाले कर रहे हैं। दिन-रात खेतों में जल रही पराली से वातावरण में धुआं फैल रहा है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ आमजन को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अक्टूबर में धान की कटाई के साथ ही किसान गेहूं की बोवनी की तैयारी में जुट जाते हैं। अधिकांश किसान कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई कराते हैं, जिससे खेतों में फसल के अवशेष रह जाते हैं। ऐसे में समय और मेहनत बचाने के लिए कई किसान पराली को आग लगाकर नष्ट कर देते हैं। यही वजह है कि इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। खेतों से उठने वाला धुआं आसपास की आबादी तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।

धुएं से सांस लेने में परेशानी, पर्यावरण पर असर
खेतों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा में फैलकर प्रदूषण बढ़ाता है। इसका असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर अधिक पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह धुआं उठने से लोगों को स्वच्छ हवा में सांस लेने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को भी नुकसान पहुंच सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
विकल्प मौजूद, फिर भी जला रहे पराली
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसल अवशेषों को जलाने के बजाय कृषि यंत्रों और अन्य वैकल्पिक उपायों से उनका उचित प्रबंधन किया जा सकता है। पराली से जैविक खाद तैयार करने सहित अन्य उपयोगी विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं। इससे जहां पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है, वहीं मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। इसके बावजूद कई किसान इन विकल्पों को अपनाने के बजाय पराली जलाने का रास्ता चुन रहे हैं।
किसान संगठनों के साथ बैठक में कलेक्टर ने की अपील
पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए कलेक्टर रोहित सिसोनिया ने किसान संगठनों के पदाधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक की। बैठक में उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इस दौरान कलेक्टर ने किसानों को मोबाइल के माध्यम से खाद के लिए ई-टोकन जनरेट करने की प्रक्रिया भी समझाई। किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने, खाद की उपलब्धता, खेतों में नीचे लटकती विद्युत लाइनों और आड़े-तिरछे बिजली के पोलों की समस्याएं उठाईं। कलेक्टर ने किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन के वैकल्पिक उपाय अपनाने की अपील की।
निगरानी और कार्रवाई की जरूरत
प्रशासन की अपील और पराली जलाने पर प्रतिबंध के बावजूद घटनाएं सामने आने से ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी बढ़ाएं और किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक करें। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र में बढ़ते धुएं और प्रदूषण पर अंकुश लगाया जा सके।