बालमपुर घाटी से त्रिमूर्ति चौराहे तक रोज हो रहे हादसे, सड़क पर बेसहारा मवेशी बन रहे वाहन चालकों और खुद के लिए जानलेवा
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर बेसहारा मवेशियों की जान लगातार जा रही है। बालमपुर घाटी से लेकर त्रिमूर्ति चौराहे तक हाईवे पर आए दिन वाहन मवेशियों को टक्कर मार रहे हैं। अब तक इस करीब 50 किलोमीटर के मार्ग पर लगभग 40 मवेशियों की दुर्घटनाओं में मौत हो चुकी है। इसके बावजूद हाईवे से मवेशियों को हटाने और हादसों को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
गुरुवार को भी हाईवे पर दो अलग-अलग स्थानों पर मवेशियों की मौत हो गई। बालमपुर मिलिट्री कैंप की पुलिया के पास अज्ञात वाहन ने एक मवेशी को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके कुछ ही आगे चंद्र गार्डन के पास भी एक मवेशी को वाहन ने टक्कर मार दी, उसकी भी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

वहीं दीवानगंज फैक्ट्री चौराहे के पास दुर्घटना में घायल एक मवेशी तीन से चार दिन तक सड़क किनारे तड़पता रहा। जानकारी मिलने के बाद गौसेवक मौके पर पहुंचे और घायल मवेशी का उपचार किया। लगातार हो रही घटनाओं से साफ है कि हाईवे पर मवेशियों की मौजूदगी वाहन चालकों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है। पिछले वर्ष भी 60 पशुओं की मौत दुर्घटना में हुई थी। इतनी मौत होने के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। जबकि दीवानगंज क्षेत्र के 10 किलोमीटर दायरे में एक करोड़ 51 लाख से गौशाला का निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिनमें से दो गौशाला तो बनकर तैयार हो गई लेकिन पशुओं को छोड़ जाना अभी तक प्रारंभ नहीं हो सका है। एक गौशाला बिजली और पानी की कमी से खंडार स्थिति में पहुंच गई तो दूसरी गौशाला बनकर तैयार खड़ी है। लेकिन पशुओं को उसमें नहीं छोड़ा जा रहा है।
रोज का खतरा, जिम्मेदारी तय करने की मांग
हाईवे-18 पर खासकर घाटियों, मोड़ों और चौराहों के आसपास सड़क पर बैठे या घूमते मवेशी अचानक वाहनों के सामने आ जाते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के कारण चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिलता। कई बार मवेशियों को बचाने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होने का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि बालापुर घाटी से त्रिमूर्ति चौराहे तक मवेशियों की मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। लोगों ने संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन से सड़क से मवेशियों को हटाने, उनके लिए सुरक्षित व्यवस्था करने और हादसों की रोकथाम के लिए ठोस