सागर। मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य पद के प्रत्याशी एवं जिला अधिवक्ता संघ सागर के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता अंकलेश्वर दुबे ने अधिवक्ताओं के कल्याण और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर मुख्य पीठ में चल रही एक जनहित याचिका में हस्तक्षेप याचिका (Intervention Application) दायर की है। इस प्रकरण में अधिवक्ता राज ठाकुर ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखते हुए वकीलों की समस्याओं को विस्तार से रखा। इसको हाईकोर्ट ने स्वीकार लिया है। अब अगली सुनवाई पर वकीलों की नजर टिकी है। जिसमें प्रदेशभर के वकीलों की सुविधाओं की मांग की गई है ।
वकीलों के हितों के लिए उठाई आवाज
अधिवक्ता अंकलेश्वर दुबे और राज ठाकुर ने बताया कि इस हस्तक्षेप याचिका के माध्यम से न्यायालय का ध्यान अधिवक्ताओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगों की ओर आकर्षित किया गया है। प्रमुख मांगों में जूनियर वकीलों के लिए मासिक स्टाइपेंड लागू करना शामिल है, ताकि शुरुआती दौर में आर्थिक संघर्ष कर रहे नए अधिवक्ताओं को सहारा मिल सके।
इसके अलावा वरिष्ठ और बुजुर्ग अधिवक्ताओं के लिए प्रभावी पेंशन योजना लागू करने तथा अधिवक्ताओं और उनके परिवारों के लिए समूह मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा प्रदान करने की मांग भी उठाई गई है।
अन्य राज्यों का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि झारखंड, केरल, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में जूनियर वकीलों को स्टाइपेंड और समूह बीमा जैसी योजनाएं लागू हैं। इसी आधार पर मध्यप्रदेश में भी ऐसी योजनाएं लागू किए जाने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से इस तरह की मांगें लगातार उठ रही हैं।
न्यायालय से उचित निर्देश की अपेक्षा
अंकलेश्वर दुबे, जो जिला बार एसोसिएशन सागर के तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं, ने कहा कि वे अधिवक्ताओं के अधिकारों और उनके समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त कल्याणकारी योजनाओं का अभाव है, जिससे उन्हें आर्थिक और चिकित्सीय आपात स्थितियों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
याचिका में माननीय उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि इन मुद्दों पर विस्तृत सुनवाई कर उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। याचिकाकर्ताओं को उम्मीद है कि निर्णय अधिवक्ताओं के हित में आएगा।