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छिंदवाड़ा का लाल जम्मू में आतंकी मुठभेड़ में शहीद, शुक्रवार को आएगा शव

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तारकेश्वर शर्मा

मप्र के छिंदवाड़ा के लाल भारत यदुवंशी जम्मू कश्मीर में भारत माता की रक्षा करते हुए शहीद हो गए हैं। भारत की शहादत की खबर लगते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में शोक की लहर है। शहीद जवान का शव शुक्रवार को गृहगांव आएगा।

 

भारत यदुवंशी छिंदवाड़ा जिले के ग्राम रोहना के शंकर खेड़ा का निवासी था। बुधवार को जम्मू में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान ग्रेनेट के हमले से भारत शहीद हो गए। भारत ने 2015 में आर्मी ज्वाइन की थी, तब से लगातार वे सीमा पर तैनात होकर देश सेवा कर रहे थे। आतंकियों से लोहा लेते हुए महज 28 साल की उम्र में भारत शहीद हो गए।

गांव में शोक की लहर

जैसे ही भारत यदुवंशी के शहीद होने की खबर पहुंची, पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ पड़ी। जवान बेटे के शहीद होने की खबर सुनकर मां की तबीयत बिगड़ गई। वहीं, पत्नी और बच्चों का भी रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद भारत को पूर्व सीएम कमलनाथ और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने श्रद्धांजलि दी।

बुधवार शाम को हुई थी मुठभेड़

भारत यदुवंशी जम्मू कश्मीर के दुर्ग मुला क्षेत्र के कुपवाड़ा में सुरक्षा बलों के साथ तैनात थे, यहां बुधवार शाम को आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान वे ग्रेनेट के हमले से बुरी तरह घायल हो गए थे। जहां ज्यादा चोट लग जाने के कारण उनकी जान चली गई।

शुक्रवार को होगा अंतिम संस्कार

परिजनों के मुताबिक शहीद भारत यदुवंशी का शव शुक्रवार को छिंदवाड़ा पहुंचेगा। जहां उनका पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। भारत के शहीद होने की खबर लगते काफी संख्या में लोग उनके घर पर इकट्ठा हो गए हैं।

शहीद भारत की पत्नी गर्भवती है

शहीद भारत यदुवंशी की पत्नी उर्मिला यदुवंशी की हालत उनका शहादत की खबर सुनते ही बिगड़ गई। उर्मिला चार माह की गर्भवती है। भारत और उर्मिला की दो छोटी बेटियां हैं। पिता के शहीद होने की खबर मिलने के बाद से बेटियों का भी रो-रोकर बुरा हाल है। मां सुशीला और पिता ओंकार के आसूं बेटे की शहादत की खबर मिलने के बाद से थम नहीं रहे हैं।

छोटा भाई भी फौज में

देश की सरहद पर आतंकवादियों की गोलियों का निशाना बने भारत यदुवंशी का छोटा भाई नारद यदुवंशी भी बारामुला जिले में सरहद पर तैनात है। उनके पिता ओमकार यदुवंशी की 6 एकड़ जमीन है, जिससे वह खेती किसानी कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। उन्होंने देश सेवा के लिए अपने दोनों बेटों को सरहद पर भेजा था, जिसमें से एक बेटा भारत मां की रक्षा के दौरान शहीद हो गया।

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