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खोज-खबर:: CM मोहन यादव की योजनाओ को पलीता लगा रहा तहसील कार्यालय

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-रात गहराते ही कार्यालय में बढ़ने लगती हे रौनक
-पटवारी,आर आई और अधिकारियो के आते ही वाहनो का लगता हे हुजूम
-हितग्राही रात में अपने मामले सलटाने आना होते हे शुरु
-रात में लगता हे तहसील कार्यालय में मेला,दर रात तक खुला रहता हे दफ़्तर
अनिल सक्सेना रायसेन

इन दिनों रायसेन जिला मुख्यालय पर तहसील कार्यालय की रौनक देखते बनती हे। जैसे जैसे अंधेरा बढ़ता हे तहसील कार्यालय,नायव तहसीलदार कार्यालय की रौनक में इजाफा होने लगता हे। और ये होये क्यो न। साहब लोग दिन में कार्यालय में बैठना पसंद नही करते फील्ड पर रहते हे। यही हाल पटवारी और गिरदावर साहब का हे। शाम होते ही अपने (निजी रूप से रखे) सहायको के साथ फ़ाइल लेकर जमा होना शुरु हो जाते हे। इसके बाद जिन लोगो के काम दिन ले उजाले में नही होते उन्हें यह टीम रात के अंधेरे में रोशन कमरों में बैठकर निपटाती हे।
जी हां इन दिनों रायसेन जिला मुख्यालय का तहसील कार्यालय अपनी कर्तव्य निष्ठा और लगन के चलते चर्चा में हे। साहब लोग अपने मातहदो के साथ फील्ड में और देर रात तक दफ्तर में काम करते रहते हे।इतना समर्पण और काम करने का जज्बा और कही दिखाई नही देगा।


सी एम की योजना ऑन लाइन नामांत्रण हो,लेकिन पटवारी,तहसीलदार को ऑफ लाइन में इंट्रेस्ट

मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव एक और जहां सिस्टम में पारदर्शिता और तत्काल सहायता की बात कर रहे हे वही रायसेन तहसील में ऑन लाइन नामांत्रण एप्लाई करने के बाबजूद या तो उसे सिस्टम पर रिजेक्ट कर दिया जाता हे। या फिर वह यथा स्थिति में रहता हे। ऐसे में तहसीलदार पटवारी और पटवारी तहसीलदार पर जबाबदेही डालते रहते हे। फिर शुरु होता हे ऑफ लाइन नामांत्रण का खेल। पटवारी अपने निजी सहायको के माध्यम से नामांत्रण कराने वाले व्यक्ति को बुलाते हे और नामांत्रण के लिए पूरे दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाते हे। जब ऑन लाइन दस्तावेज डाले गये फिर ऑफ लाइन दस्तावेजो का सत्यापन किस आधार पर किया जाता हे। यह प्रश्न अनुतरित रहता हे। इसके बाद 10 हजार 20 हजार या फिर जितनी बड़ी सम्पत्ति उसके लिए उसी अनुपात से राशि की मांग होती हे। और सक्षम व्यक्ति झंझटो से बचने सहर्ष इस सिस्स्टम को अपना लेते हे। जबकि आम आदमी जो इतनी रकम नही दे पाता असहाय होकर तहसील कार्यालय के चक्कर लगाता रहता हे।
बात सीमांकन की
तहसील कार्यालय में सीमांकन् के लिए भी ऑन लाइन आवेदन की व्यवस्था हे। लेकिन इसके लिए भी सिस्टम नामांत्रण की जो प्रक्रिया तहसील में प्रचलित हे उसी के तहत नामांत्रण होते हे।यहां भी सिस्टम् अनुसार ऑफ लाइन प्रक्रिया के तहत एक निश्चित सौदेवाजी के साथ जमीनो का सीमाँकन होता हे। इसके लिए सेटेलाइट सीमाँकन के लिए निजी लोगो की सेवाएं ली जाती हे जो अपनी मशीन लेकर आते हे और सीमाँकन् करते हे। इसके लिए इन निजी मशीन बालो को अलग से 3 से 10 हजार रुपए दिलाये जाते हे।और पटवारी गिरदावर का मेहनताना नजराने के रूप में अलग से लिया जाता हे। पटवारी गिरदावर के दफ्तर भी अलग हे जो सुविधानुसार किसी निजी मकानो से संचालित होते हे। जहां इनके निजी सहायक ही हितग्राही से बात चीत कर सोदा तय करते हे। और ऐसा हो भी क्यो न ,क्योकि यह पटवारी गिरदावर कंप्यूटर का ज्ञान ही रखते।और लिखा पड़ी में इनका विश्वास नही।सब काम निजी सहायक के जिम्मे रहता हे।साहब लोग सिर्फ हस्ताक्षर करते हे।यदि दस्तावेजो में किसी हस्तलिपि विशेषज्ञ से इसकी जांच करा ली जाए तो सारा सच सामने आ जाये।
बात आय जाति मूलनिवासी प्रमाण पत्र की

तहसील कार्यालय में आय जाति मूलनिवासी प्रमाण पत्र बनाने की एक समानातर व्यवस्था हे। यहां आवेदन जमा करने के बाद प्रमाणपत्र बनवाने तहसील के परिसर में टेबिल लगाए बैठे लोगो का नाम बताया जाता हे वहां चले जाओ बन जाएगा। एक निश्चित राशि तय होने के बाद अगले दिन यह प्रमाणपत्र वो बाहरी कर्मचारी बनवा देते हे। जिनका तहसील,नायव तहसीलदार कार्यालय सहित लोक सेवा केंद्र तक जुगाड़ हे।यह लोग पटवारी गिरदावर की टीप भी लगवा लेते हे।बाकी यदि आप अपना काम एक निश्चित प्रक्रिया के साथ कराना चाहते हे तो फिर लगाते रहे दफ़्तरों के चक्कर।

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