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सीटें हुईं कम फिर भी तेवर बरकरार, इमरजेंसी पर निंदा प्रस्ताव लाकर सरकार ने विपक्ष को चौंकाया

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संसद में सरकार ने बुधवार को साफ कर दिया कि आंकड़े भले उम्मीद से कम आए हैं पर सरकार का तेवर बरकरार रहेगा. नए लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के तुरंत बाद लोकसभा के पहले सत्र में ही सरकार और विपक्ष के बीच आमना-सामना देखने को मिला. दरअसल जैसे ही लोकसभा में पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों का परिचय कराया उसके तुरंत बाद स्पीकर ने 1975 में आपातकाल लगाए की निंदा करते हुए प्रस्ताव पढ़ा.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के फैसले को संविधान पर हमला करार दिया. जैसे ही स्पीकर ने प्रस्ताव पढ़ना शुरू किया, विपक्ष को समझ नहीं आया कि क्या हुआ? राहुल गांधी भी अपने सांसदों की तरफ देखने लगे कि क्या हुआ?

सदन में विपक्ष द्वारा विरोध शुरू हो गया. तमाम कांग्रेस सांसद अपनी सीट पर खड़े होकर नारे लगाने लगे. कांग्रेस सांसद .. तानाशाही बंद करो लोकतंत्र की हत्या बंद करो …के नारे लगाते हुए वेल के पास आ गए.

आपातकाल पर प्रस्ताव पर चौंक गया विपक्ष

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, के सुरेश लगातार स्पीकर की तरफ देखकर पूछते रहे कि ये क्या हो रहा है? ये दोनों कभी चेयर की तरफ देखते तो कभी सीट पर बैठे राहुल गांधी को, लेकिन जहां एक तरफ कांग्रेस सांसद वेल के पास आकर नारे लगा रहे थे. तो वहीं बाकी विपक्षी दल अपने अपनी सीटें पर ही बैठे रहे.

अखिलेश यादव समेत तमाम विपक्षी नेता भी अपनी सीट पर बैठे रहे. जैसे ही प्रस्ताव खत्म हुआ तो स्पीकर ने सदस्यों से कुछ देर मौन रहने का आग्रह किया. स्पीकर के इस आग्रह के बाद सत्ता पक्ष के सांसद और विपक्ष के सांसद भी अपनी जगहों पर खड़े हो गए. ये देखकर राहुल गांघी भी अपनी जगह पर खड़े हो गए. नारेबाजी कर रहे सांसद भी मौन हो गए ,हालांकि मौन के बीच में एक-दो नारे भी लगाए गए.

भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

मौन के बाद में जैसै ही कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित हुई तो राहुल गांधी ने अपने सांसदों की तरफ देखकर सरकार के इस रूख के खिलाफ चेहरा बनाया. सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित होने के तुरंत बाद, बीजेपी सदस्यों ने संसद के बाहर तख्तियां लहराकर और नारे लगाकर विरोध प्रदर्शन किया.

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि आज का दिन बहुत ऐतिहासिक था, जब आपातकाल के 50 साल पूरे हुए. 18वीं संसद में स्पीकर ने इस प्रस्ताव के माध्यम से सच्चाई सामने रखी कि आपातकाल सिर्फ और सिर्फ इंदिरा गांधी की कुर्सी बचाने के लिए लगाया गया था. आज 50 साल बाद हम प्रतिबद्ध हैं. आपातकाल कभी नहीं लगाया जाएगा और कांग्रेस पार्टी संविधान की किताब रखकर दिखावा करना बंद करे.

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