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रहवासी मकानों से लगकर गांव में बनी मौत की फैक्ट्री,दहशत के बीच जिंदगी जीते हैं ग्रामीण

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-फर्नेश ब्लास्ट की धमक से दर्जनों मकानों को पहुची क्षति,फेक्ट्री हटाने की उठी मांग

सुरेन्द्र जैन सांकरा रायपुर

छत्तीसगढ़ की राजधानी के समीप ग्राम कपसदा के ग्रामीण दहशत के बीच जिंदगी जीते है गांव की बस्ती के रहवासी मकानों से सटी फार्च्यून टीएमटी फेक्ट्री की चौबीस घन्टे तेज आवाज प्रदूषण और अक्सर होने वाली दुर्घटनाओं से ग्रामीण सहमे रहते हैं हाल ही में फेक्ट्री के फर्नेश में हुए ब्लास्ट से कई रहवासी मकानों को क्षति पहुची है लगातार तीन चार बार आवाज के साथ फर्नेश मे हुए ब्लास्ट के समय ग्रामीण घबराकर घरों से बाहर निकल गए थे।


फार्च्यून टीएमटी फेक्ट्री के फर्नेश में हुआ ब्लास्ट इतना तेज था कि फेक्ट्री से लगी गांव की बस्ती के मकानों में उसकी धमस महसूस हुई ग्रामीणो के मुताबिक जब ब्लास्ट हुआ तो फेक्ट्री से चार बार तेज आवाज आई और भारी धुंआ निकला ग्रामीण घबराकर अपने घरों से बाहर आ गए।
गुरुवार को ग्रामीणो ने जिला ग्रामीण कांग्रेस के नेतृत्व में जनप्रतिनिधयों के साथ फेक्ट्री के सामने धरना प्रदर्शन भी किया कांग्रेस नेत्री श्रीमत्ति छाया वर्मा पीसीसी महामंत्री भावेश बघेल जिला ग्रामीण

कांग्रेस अध्यक्ष उधोराम वर्मा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष दुर्गेश वर्मा धरसीवा उपसरपंच साहिल खान के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी बात प्रशासन के समक्ष रखी ग्रामीणो की समस्याओं को सुनने के बाद नायब तहसीलदार धरसीवा फेक्ट्री प्रबंधन को साथ लेकर फेक्ट्री से सटे गांव के रहवासी मकानों को देखने पहुचे ओर फेक्ट्री में हुए ब्लास्ट से रहवासी मकानो को हुई क्षति को देखा इसके बाद प्रबंधन प्रशासन और ग्रामीणो व जनप्रतिनिधियों के बीच काफी देर तक चर्चा हुआ जिसमे फेक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ ग्रामीणो में भारी नाराजगी देखी गई
नायब तहसीलदार के समक्ष यह तय हुआ कि फर्नेश ब्लास्ट से जो फेक्ट्री से सटे रहवासी मकानों को क्षति हुई है उसका सर्वे कराकर उन्हें क्षति पूर्ति फेक्ट्री प्रबंधन देगा साथ ही इस हादसे में जिस श्रमिक की मृत्यु हुई उसे पर्याप्त मुआवजा व घायलों का समुचित उपचार कराया जाएगा


घटना के बाद फेक्ट्री बन्द न होने से बढ़ा आक्रोश
इतना बड़ा हादसा होने और श्रमिक की मौत के बाबजूद फेक्ट्री में काम बन्द न करने से ग्रामीणो का आक्रोश बढ़ गया जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्य्क्ष उधोराम वर्मा ने कहा कि जिन श्रमिको से फेक्ट्री चलती है उनमें से किसी की दर्दनाक मौत के बाद भी फेक्ट्री प्रबंधन ने मानवीयता नहीं दिखाई और एक मिनिट को भी फेक्ट्री में काम बन्द नहीं किया यह बड़े दुर्भाग्य का विषय है।


बस्ती के बीच कैंसे मिली एनओसी
जिस जगह फार्च्यून टीएमटी फेक्ट्री है उसके आजू बाजू कृषि भूमि और पीछे रहवासी मकान हैं मतलब कृषि भूमि खरीदकर ही उस पर फेक्ट्री का निर्माण हुआ लेकिन गांव की बस्ती से सटकर फेक्ट्री को एनओसी कैसे ओर किसने दी यह समझ से परे है चौबीस ग्घन्टे फेक्ट्री की तेज आवाज से ग्रामीण परेसान रहते हैं वहीं उसका प्रदूषण और जब कभी फर्नेश ब्लास्ट जैंसे घटना होती है तो ग्रामीणो की जान पर बन आती है अब सवाल यह उठता है कि आख़िर गांव बस्ती ओर ग्रामीणो की जान कीमती है या फेक्ट्री ।

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