सुरेंद्र जैन धरसीवां
महा तपस्वी समाधिस्थ दिगंबर जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी के परम प्रभावी शिष्य वर्तमान आचार्यश्री समय सागर जी के शिष्य पूज्य दिगंबर जैन मुनि आगम सागर जी का तिल्दा नेवरा से सिमगा की ओर मंगल विहार हुआ।
नेवरा जैन समाज के बंटी जैन ने बताया कि पूज्य मुनिश्री का ससंघ मंगल विहार सिमगा की ओर हुआ रात्रि विश्राम तिल्दा ओर सिमगा के मध्य होगा कल सुबह सिमगा में मुनि संघ की अगवानी होगी संभावना है कि सिमगा से तरपोंगी होते हुए धरसीवा सांकरा मार्ग से जैनमुनि रायपुर की ओर विहार करेंगे पूज्य मुनि संघ के रायपुर में चातुर्मास की संभावना है
*तिल्दा नेवरा से जुड़ी हैं आचार्यश्री की अंतिम यादें*
तिल्दा नेवरा देशभर की जैन समाज के लिए बहुत महत्व रखता है कारण यह कि तिल्दा नेवरा में महातपस्वी आचार्यश्री विद्यासागर जी महामुनिराज के मंगल आशीर्वाद से बहुत कम समय में पीले पाषाण का भव्य मंदिर बहुत कम समय में बनकर तैयार हुआ था विहार के दौरान आचार्यश्री के मंगल आशीर्वाद से उनके ही सानिध्य में भूमिपूजन हुआ ओर आचार्यश्री के ही सानिध्य में वेदी प्रतिष्ठा ओर पंचकल्याणक हुए
इसमें भी सबसे खास बात ये कि तिल्दा नेवरा का पंचकल्याणक आचार्यश्री के तपस्या काल का अंतिम पंचकल्याणक हुआ ओर जब पंचकल्याणक हुआ तो तिल्दा नेवरा की जैन समाज के अलावा ब्राह्मण समाज अग्रवाल समाज सिंधी समाज सहित सभी वर्गों का पंचकल्याणक को ऐतिहासिक बनाने में अहम योगदान रहा सभी वर्गो में अटूट आस्था से आचार्यश्री ओर आचार्यश्री का मन भी प्रसन्न था ये पंचकल्याणक आचार्यश्री के तप काल का अंतिम पंचकल्याणक हुआ यहां से रायपुर होते विहार करते हुए आचार्यश्री डोंगरगढ़ पहुंचे जहां कुछ समय पश्चात आचार्यश्री की यम सल्लेखना समाधि हुई यही कारण है कि रायपुर बिलासपुर मार्ग पर जब भी आचार्यश्री के शिष्यों का विहार होता है तो उनका तिल्दा नेवरा जान निश्चित रहता है