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रायसेन की रामलीला :: प्रेम के वसीभूत भगवान राम ने शबरी के खाए झूठे बेर

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– हनुमान जी ने सुग्रीव से कराई राम की मित्रता

सुग्रीव और बाली के बीच युद्ध के दौरान भगवान राम ने बाली को वान मार कर किया वध

सी एल गौर रायसेन

श्री रामलीला महोत्सव के चलते शुक्रवार को स्थानीय कलाकारों द्वारा सुग्रीव मित्रता एवं बाली वध की लीला का मैदानी मंचन किया। प्रस्तुत की गई लीला के अनुसार भगवान राम और लक्ष्मण दोनों भाई सीता की खोज में वन में विचरण करते हैं, इस दौरान उन्हें एक आश्रम दिखाई देता है जहां भीलनी शबरी नामक वृद्धा निवास कर रही होती है वहां उनके पास पहुंचते हैं और अपना परिचय शबरी के लिए देते हैं तो वह मन ही मन प्रसन्न हो जाती है और प्रभु श्री राम लक्ष्मण के पैर पकड़ लेती है और अपने आश्रम में ले जाती है जहां वह भगवान राम के अति प्रेम के चलते बेर तोड़ कर लाती है कहीं खट्टे न हो इस कारण वह वेरो को चखते हुए मीठे मीठे बेर अपने हाथों से भगवान राम को खिलाती है और भगवान राम भी शबरी के प्रेम के चलते प्रेम के साथ बेर खाते हैं वन

 

भगवान राम प्रसन्न होकर शबरी को नवधा भक्ति के बारे में विस्तार से बताते हैं, इस प्रकार से सबरी भी भगवान राम के प्रताप से तर जाती है । शबरी भगवान राम लक्ष्मण को रास्ता बताते हुए पंपापुर के लिए भेज देती है जैसे ही राम लक्ष्मण वन में चलते हैं जहां उन्हें एक नदी मिलती है वहां स्नान आदि कर्म क्रिया करने के पश्चात वह वन में विचरण करते हैं इसी दौरान भगवान राम की हनुमान जी से भेंट होती है, परंतु हनुमान जी उन्हें पहचानते नहीं है तो भगवान राम और लक्ष्मण हनुमान जी को अपना पूरा पता बताते हैं नाम बताते हैं और कहते हैं कि किसी ने हमारी भारया सीता का हरण कर लिया है हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है।

इधर हनुमान जी भगवान राम का नाम सुनकर अति प्रसन्न होते हैं और किष्किंधा के राजा सुग्रीव के पास मित्रता कराने के लिए ले जाते हैं, इस समय की लीला अति सुंदर होती है जिसे देखकर दर्शक भी भाव विभोर हो जाते हैं, इस प्रकार से हनुमान जी ने भगवान राम की सुग्रीव से मित्रता कराई। इधर सुग्रीव अपनी पूरी कहानी भगवान राम को बता देते हैं, प्रस्तुत की गई, इसी क्रम में बाली किसी राक्षस का पीछा करते हुए गुफा में प्रवेश कर जाता है और उसे गुफा के भीतर ही मार देता है गुफा के अंदर से खून की धारा वह पड़ती है इधर सुग्रीव को बाली ने पहले से ही पहरे पर रहने के लिए कहा था परंतु सुग्रीव खून की धारा देखकर वहां से वापस आ जाते हैं उधर वाली बमुश्किल गुफा के अंदर से आता है और सुग्रीव के ऊपर चढ़ाई कर देता है कहता है कि तू भाई नहीं मेरा दुश्मन है मैं अब तुझे छोड़ूंगा नहीं इस प्रकार से सुग्रीव और बाली के बीच काफी देर तक युद्ध होता है सुग्रीव को बाली काफी पिटाई करते हुए परेशान करता है तो सुग्रीव फिर भगवान राम लक्ष्मण की शरण में पहुंचता है और मिलते हुए कहता हैं कि हे राम बाली तो अति बलशाली है उसने मेरी मार मार कर खराब हालत कर दी । इधर भगवान राम आश्चर्य में पड़ जाते हैं क्योंकि सुग्रीव और बाली दोनों भाइयों की सूरत एक जैसी थी तो भगवान राम ने सुग्रीव के गले में माला पहना दी ताकि उसकी पहचान हो सके और सुग्रीव को दोबारा बाली से युद्ध करने के लिए भेजते हैं तभी युद्ध के दौरान भगवान राम वृक्ष लताओं की आड़ में छुपकर बाली को तीर कमान से वाण मार देते हैं जिससे वाली वही धराशाई हो जाता है, इस दौरान वाली ने भगवान राम से पूछा कि मैं वेरी सुग्रीव प्यारा,, कारण कहहु नाथ मोहि मारा,, अर्थात बाली कहता है कि हे राम मुझमें क्या बुराई है मुझे क्यों मार दिया सुग्रीव क्यों आपको प्यारा है इस प्रकार से कहते हुए बाली अपने प्राण त्याग देता है।

रामलीला में शनिवार को होगी लंका दहन प्रसंग की आकर्षक प्रस्तुति

रामलीला मेला आयोजन समिति के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शनिवार को रामलीला मैदान में लंका दहन नामक प्रसंग की आकर्षक लीला का मंचन कलाकारों द्वारा किया जाएगा हनुमान जी लंका में प्रवेश कर रावण की सोने की लंका को जलाएंगे, इस आकर्षक प्रसंग की लीला को देखने एवं धर्म का लाभ उठाने की अपील रामलीला मेला समिति के पदाधिकारीयो ने सभी धर्म प्रेमियों से की है।

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