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कियोस्क संचालक लगा रहे गरीबों के खातों में सेंध थाने में हुई शिकायत

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छतरपुर। बुजुर्ग महिलाओं और लाड़ली बहनों के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं का लाभ कियोस्क संचालक उठा रहे हैं। कियोस्क संचालक फर्जी हस्ताक्षर कर केवायसी के नाम पर अंगूठा लगवाकर हितग्राहियों के खातों में डाका डाल रहे हैं। इस फर्जीवाड़े की हकीकत खुद पीड़ितों ने खोली है जो कियोस्क संचालकों के फर्जीवाड़े का शिकार हुए हैं। छतरपुर जिले के बारीगढ़ में ऐसे तीन मामले सामने आए हैं।

केस 1

गायत्री प्रजापति ग्राम पंचायत बदौरा निवासी है। आरोप है कि बारीगढ़ के कियोस्क संचालक शैलेन्द्र सिंह ने 11 जुलाई को इनके खाते से 1500 रुपये निकाल लिए और महिला को खाते में पैसे न होने की बात कहकर चलाता कर दिया। खाते का स्टेटमेंट निकलवाने के बाद पता चला कि कियोस्क संचालक ने राशि निकाल ली। महिला ने जब जुझार नगर थाना और शाखा प्रबंधक से कियोस्क संचालक की लिखित शिकायत की तो कियोस्क संचालक शैलेन्द्र सिंह ने पैसे उसके खाते में दोबारा ट्रांसफर कर दिए।

केस 2

सरस्वती राजपूत ग्राम पंचायत चौहानी की निवासी है, इन्होंने कियोस्क सेंटर कुबेर राजपूत से खाता चेक करवाया था। संचालक ने पिछले वर्ष 7 अक्टूबर, 14 नवंबर और 18 नवंबर को खाता चेक किया था। महिला का आरोप है कि इस दौरान उसे पैसे नहीं दिए गए। बल्कि तीनों ही बार कियोस्क संचालक ने 2-2 हजार कर कुल 6 हजार रुपये निकाल लिए। महिला ने जूझार नगर थाना और शाखा प्रबंधक से मामले की शिकायत की है।

केस 3

भूरा राजपूत पेशे से किसान हैं और ग्राम पंचायत हटवा के निवासी हैं। इन्होने भी पिछले वर्ष 9 सितंबर को कियोस्क संचालक कुबेर राजपूत से खाता चेक करवाया था। जहां कियोस्क संचालक ने इन्हें रुपये नही दिए, लेकिन इनके खाते से दस-दस हजार रुपये दो बार में कट गए। जिसकी पुष्टि खाते के स्टेटमेंट से हुई है। इसकी शिकायत जुझार नगर थाना और बैंक के शाखा प्रबंधक से की गई है। हालांकि शाखा प्रबंधक ने ट्रांजेक्शन रजिस्टर में भूरा राजपूत के हस्ताक्षर होना बताया है।

बैंक मैंनेजरों को मामले का पता फिर भी कार्रवाई नहीं

बता दें कि इस मामले मे बैंक मैनेजर्स पर भी आरोप हैं। दरअलल, कियोस्क संचालकों की मनमानी बैंक मैनेजर की शह पर ही बरकरार है। इसी वजह से कियोस्क ग्राहकों पर संचालक हावी भी हो रहे हैं। शाखा प्रबंधक के द्वारा न तो कियोस्क शाखा का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता और न ही कियोस्क बनाते समय संचालक की जानकारी ली जाती है। जिससे जो ग्राहक परेशान होकर आवेदन करते है, उनका समझौता शाखा में ही करा दिया जाता है और जो कियोस्क खाता धारक जागरूक नहीं होते उनके पैसे शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से कियोस्क संचालक चट कर जाते हैं।

मुझे तीन शिकायक प्राप्त हुई थीं, जिसमें मैंने भूरा राजपूत का ट्रांजेक्शन रजिस्टर में चेक किया था जो मिला है, बाकी दो गायत्री प्रजापति का एक और सरस्वती राजपूत के तीन ट्रांजेक्शन रजिस्टर में चेक करना बाकी है, जांच उपरांत कार्रवाई की जाएगी। –मयंक त्यागी, बैंक मैनेजर, SBI शाखा बारीगढ़

कियोस्क संचालक लोगों की सुविधाओं के लिए बने हैं। अगर वह लोगों के साथ फर्जीवाड़ा करके पैसे निकालने का काम कर रहे हैं तो ऐसे कियोस्क संचालकों पर तत्काल कार्रवाई कराई जाएगी। – रविशंकर सिन्हा, लीड बैंक अधिकारी, छतरपुर

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