सड़क पर संग्राम: ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ पर अड़े ग्रामीण, SDM-तहसीलदार की समझाइश के बाद शुरू हुई वोटिंग
सड़क की बदहाली पर ग्रामीणों का वोट बहिष्कार
सालेरा-मऊ पथरई में मतदान को लेकर बना तनावपूर्ण माहौल, अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद टूटा गतिरोध
सी के पारे रायसेन
वर्षों से बदहाल सड़क से परेशान रायसेन के सालेरा और मऊ पथरई क्षेत्र में मंगलवार को जिला पंचायत वार्ड क्रमांक-3 मेहगांव के उपचुनाव के दौरान मतदान को लेकर बड़ा गतिरोध खड़ा हो गया। सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा देते हुए मतदान का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया था।
सुबह मतदान शुरू होने के बाद ग्रामीण अपने रुख पर कायम रहे। सूचना मिलते ही एसडीएम मनीष शर्मा और
तहसीलदार भरत कुशवाहा मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उन्हें समझाइश देते हुए मतदान करने की अपील की।
SDM मनीष शर्मा और तहसीलदार भरतसिंह की समझाइश के बाद ग्रामीणों ने मतदान शुरू कर दिया और मतदान केंद्रों पर वोटिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

गांवों की आवाजाही का रास्ता, फिर भी बदहाल
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क करीब अधिकांश गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क है। लंबे समय से सड़क की हालत खराब होने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण को लेकर कई स्तरों पर शिकायतें और मांगें की जा चुकी हैं।
हादसों और परेशानी का हवाला देकर जताया विरोध
ग्रामीणों ने बदहाल सड़क के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की बात कही है। स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क की स्थिति के चलते हादसों में लोगों की जान भी जा चुकी है। बुजुर्गों, बच्चों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने चुनाव से पहले रैली निकालकर ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का संदेश दिया था और मतदान से दूर रहने का सामूहिक निर्णय लिया था।
SDM और तहसीलदार की समझाइश के बाद टूटा गतिरोध
मतदान के दिन ग्रामीणों के बहिष्कार के फैसले के बाद एसडीएम मनीष शर्मा और तहसीलदार भरतसिंह मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी मांगों को सुना और मतदान का महत्व समझाते हुए वोट डालने की अपील की।
अधिकारियों की समझाइश के बाद ग्रामीणों ने मतदान शुरू कर दिया। इसके साथ ही क्षेत्र में मतदान को लेकर बना गतिरोध समाप्त हो गया।
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की ओर से सड़क की समस्या के स्थायी समाधान के लिए होने वाली कार्रवाई पर है। ग्रामीणों की मुख्य मांग अब भी साफ है—बदहाल सड़क का जल्द से जल्द निर्माण हो।