Let’s travel together.

बुदनी में बने कार्तिकेय और कुणाल पार्क पर राजनीति शुरू कांग्रेस ने लगाए आरोप

107

सीहोर। इन दिनों नाम की राजनीति बढ़ती जा रही है। काम से ज्यादा नाम पर चर्चा और बहस चल रही है। इसी क्रम में अब बुदनी के दो पार्क बहस का कारण बने हुए हैं। बहस का कारण इस बार भी काम नहीं, नाम ही है। दरअसल बुदनी में दो पार्क ऐसे हैं, जिनका नाम कार्तिकेय और कुणाल पार्क है। संयोग से क्षेत्र के विधायक और प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह के बेटों के नाम भी कार्तिकेय और कुणाल है। मामले में कांग्रेस का आरोप है कि कार्तिकेय पार्क पूर्व में नेहरू पार्क था, जिसका नाम बदला गया है। जबकि पार्क के बाहर लगी लोकार्पण पट्टिका पर इसके निर्माण का साल 2006 दर्ज है। ऐसे में कांग्रेस के आरोप की पुष्टि नहीं हो रही। भाजपा का कहना है कि पार्क का शुरुआत से यही नाम है। हालांकि इसके बाद भी भाजपा पर ये आरोप तो लग यह हैं कि पहले सार्वजनिक स्थानों और भवनों के नाम महापुरुषों के नाम पर होते थे जबकि अब जनप्रतिनिधि अपने परिवारजनों के नाम पर पार्क और भवनों के नाम रख रहे हैं।

बता दें कि कार्तिकेय पार्क का लोकार्पण वर्ष 2006 में तत्कालीन नगर परिषद अध्यक्ष आजाद सिंह राजपूत के नेतृत्व में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया था। तब से ही इस उद्यान का नाम कार्तिकेय उद्यान है। हालाकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा बुधनी विधानसभा के लिए प्रज्वल बुदनी के तहत 300 करोड़ के विकास कार्य प्रस्तावित किए हैं, जिनमें नगर के सुंदरीकरण के साथ विभिन्न वार्डों में सात पार्क बनाए जाने हैं। उन्हीं में से तीन पार्क नगर परिषद द्वारा तैयार किए जा चुके हैं उन्हीं में से दशहरा मैदान पर एक पार्क बनाया गया है, जिसका नाम कुणाल पार्क रखा गया है। इस पर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है। वहीं मामले में प्रशासन का कहना है कि पार्क का नाम कार्तिकेय पार्क ही है। साथ ही कलेक्टर प्रवीण सिंह ने बताया कि पार्क का नाम नगर परिषद तय करती है। पार्क के नाम को लेकर आरोप क्‍यों लग रहे हैं, यह शोध का विषय है।

पंडित नेहरू की तुलना में कार्तिकेय कहां – अजय सिंह

कांग्रेस नेता व पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि भारत को आजाद कराने और देश के नव निर्माण में पंडित नेहरू के योगदान के आगे कार्तिकेय कहां खड़े हैं। क्या वे नेहरू से भी बड़े हो गए हैं। क्या बुदनी की जनता को अंतर्मन से यह बात स्वीकार्य होगी। यदि नगर परिषद ने यह कार्य चापलूसी में किया है तो शिवराज सिंह को हस्तक्षेप करना चाहिए था और नेहरू का नाम हटाने से रोकना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पार्क, चौराहों, सड़कों और भवनों आदि के नामकरण उन महापुरुष, समाजसेवी या विभूतियों के नाम पर किए जाते हैं जो इस दुनिया में नहीं हैं। नामकरण के बहाने उनके योगदान को चिरस्थायी बनाया जाता है। लेकिन अब एक नई परंपरा शुरू हो गई है। बुधनी का एक अन्य पार्क भी मुख्यमंत्री के दूसरे बेटे कुणाल के नाम पर रखा गया है। शिवराज सिंह जी कृपया कुणाल के योगदान के बारे में भी जनता को बताएं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.

पटवारियों के सहायकों ने विभिन्न मांगों को लेकर दिया ज्ञापन     |     उदयपुरा में जीआई टैग को लेकर किसान संवाद, दिग्विजय सिंह बोले-बासमती की पहचान और किसानों के हक के लिए लड़ेंगे     |     खेत में करंट से चाचा-भतीजे की मौत     |     ओबेदुल्लागंज में सरेराह युवक की पिटाई, वीडियो वायरल     |     बरेली में गणेश चतुर्थी के दौरान देर रात माहौल बिगाड़ने की कोशिश,पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति को नियंत्रण में     |     गणेश चतुर्थी पर आस्था का सैलाब, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़     |     50 लाख का रेलवे ओवरब्रिज तीन साल से अधूरा, बारिश में कीचड़ में फंस रहे वाहन     |     हरतालिका तीज पर सजा सुहाग का रंग, गांव-गांव गूंजे शिव-पार्वती के जयकारे     |     हिन्दी को सशक्त बनाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी,बैंकिंग कामकाज में हिन्दी भाषा का प्रचलन बढ़ा     |     सेवा भारती के सुपोषण जागरण अभियान का हुआ समापन     |    

Don`t copy text!
पत्रकार बंधु भारत के किसी भी क्षेत्र से जुड़ने के लिए इस नम्बर पर सम्पर्क करें- 9425036811