रायपुर। वैवाहिक जीवन में अगर सुख चाहिए तो आपसी तालमेल और एक-दूसरे को गहराई से समझने का भाव अवश्य होना चाहिए। इससे रिश्तों की मिठास कभी कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ती ही जाएगी। कुछ ऐसा ही उदाहरण सीए दंपती निखिल जैन और आकांक्षा जैन ने प्रस्तुत किया है। निखिल बताते हैं कि आकांक्षा से उनकी दोस्ती सीए की पढ़ाई के दौरान हुई और धीरे-धीरे यह प्यार में बदल गई। दोनों के परिवार की रजामंदी से शादी हुई। आज उन्होंने अपने क्षेत्र में जो सफलता हासिल की है, उसमें आपसी सामंजस्य की बड़ी भूमिका रही है।
मूलत: दल्लीराजहरा निवासी निखिल बताते हैं कि उनकी आकांक्षा से अंडरस्टैंडिंग ही ऐसी है कि दोनों एक-दूसरे का सहयोग घर के हर कार्य में करते हैं। जो भी फ्री है, वह खुद आकर वांछित कार्य कर देता है, फिर वह चाहे दो साल की बच्ची की जिम्मेदारी हो या फिर घर के अन्य कार्य। दोनों ही तालमेल बैठाकर सभी कार्यों का संपादन बड़ी आसानी से कर देते हैं।
वर्कफ्राम होम का विकल्प आज भी अपना रहे
निखिल और आकांक्षा दोनों ही पेशे से सीए (चार्टर्ड एकाउंटेंट) हैं। कोविड के दौरान मिले वर्कफ्राम होम के विकल्प को वे आज भी अपने जीवन में अपना रहे हैं। निखिल तो रोजाना आफिस जाते हैं, लेकिन आकांक्षा बेटी की देखरेख के लिए घर से ही अपने काम का संपादन करती हैं। वहीं जरूरत होने पर जूम, वाट्सएप सहित अन्य माध्यमों से कलीग्स के टच में रहती हैं। बहुत ही जरूरी होने पर वे किसी क्लाइंट या फिर अन्य लोगों से मिलती हैं।
मार्निंग वाक और एक्सरसाइज से दिन की शुरुआत
निखिल और आकांक्षा के दिन की शुरुआत सुबह मार्निंग वाक और एक्सरसाइज से होती है। दोनों में से जो भी पहले उठता है, वह अगले को उठाता है। इसके बाद दोनों ही साथ में वर्कआउट करते हैं। बेटी के उठने के बाद रोजाना के जो भी काम हैं, उन्हें जो भी फ्री हो, वह कर लेता है।
हर संडे बेटी और परिवार को देते हैं समय
राजधानी के सुंदरनगर निवासी निखिल के परिवार में एक भाई और उनकी पत्नी हैं। दोनों ही डाक्टर हैं। संडे के दिन निखिल अपना पूरा दिन परिवार को समर्पित करते हैं। इस दिन बेटी सहित परिवार के अन्य सदस्यों संग घूमने जाने के साथ ही बाहर खाना भी करते हैं।
बेटी को वर्चुअल के साथ रियल लाइफ में करते हैं इन्वाल्व
अमूमन देखा जाता है कि हम बच्चों को कागजी जानकारी ही देते हैं यानी कि वर्चुअल, जबकि यह दंपती उसे रियल लाइफ में भी कन्वर्ट करने का प्रयास करता है। किताबों में शेर या फिर अन्य कोई जानवर दिखाने के बाद जंगल सफारी सहित अन्य जगहों पर ले जाकर वह बेटी को वह जानवर दिखाकर उसके बारे में ज्ञानवर्धक जानकारी भी देते हैं।
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