भोपाल। प्रदेश में कलेक्टर-कमिश्नर सहित 64 हजार कर्मचारियों के तबादले पर लगा प्रतिबंध गुरुवार से हट जाएगा। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्य के कारण इस कार्य से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादलों पर प्रतिबंध लगा था। गुरुवार को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद सरकार को तबादला करने के लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति नहीं लेनी होगी। प्रदेश में विधानसभा चुनाव नवंबर में प्रस्तावित हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने एक माह विशेष पुनरीक्षण कार्य कराकर मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन का काम कराया है। इसके लिए 64 हजार 100 मतदान केंद्रों पर बूथ लेबल एजेंट (शिक्षक, पटवारी) नियुक्त किए गए थे। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी, कमिश्नर को पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी गई थी और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व व तहसीलदार को रजिस्ट्रीकरण अधिकारी बनाया गया था। इन सभी का तबादला मतदाता सूची का काम पूरा होने तक न करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग से कहा गया था। इस अवधि में केवल निवाड़ी कलेक्टर तरुण भटनागर को हटाया गया। इसके लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के बाद विभाग ने प्रस्ताव बनाकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग को भेजा था। अनुमति मिलने के बाद तबादला आदेश जारी किए गए और नई पदस्थापना की गई। निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होने के बाद निर्वाचन कार्य में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों का सरकार चाहे तो तबादला कर सकती है। इसके लिए आयोग से अनुमित नहीं लेनी होगी
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