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प्रदूषण और संक्रमण फैलने का कारण बन रही जिला अस्पताल की गंदगी और सड़कों पर उड़ने वाली धूल

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दमोह से धीरज जॉनसन

दमोह शहर और आस- पास के इलाकों से आती दुर्गंध और हवा में फैले धूल के कण लोगों को जाने अनजाने बीमार संक्रमण के फैलने का कारण बन रहे है पर इस ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जाता है।

स्थानीय जिला अस्पताल जहां अनवरत निर्माण कार्य चलता रहता है जिससे मरीज और उनके परिजन परेशान तो होते रहते है साथ ही पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है परिसर के अंदर गन्दा और मैला पानी सड़को पर नजर आता है और यहां फैली दुर्गंध से लोगों का निकलना भी मुश्किल होता है,यहां मवेशी भी आराम से विचरण करते रहते है परंतु इनमें सुधार नहीं होता।

कुछ ऐसे ही हालात दमोह से ग्राम इमलाई की ओर जाने पर दिखाई देता है यहां बड़े वाहनो की धूल से आवागमन में परेशानी और सांस संबंधी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है पर इस ओर सुधार के लिए कोई बेहतर सुधार परिलक्षित नहीं होता है।

कहीं-कही अभी भी सुबह के वक्त होटलों पर चूल्हा जलता दिखाई देता है जिसका धुंआ फैल कर लोगों को नुकसान पहुंचाता है जिस ओर भी ध्यान दिया जाना नितांत आवश्यक है।

छिति जल पावक गगन समीरा,पंच रचित अति अधम शरीरा अर्थात् पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु इन पाँच तत्वों के सम्मिलन से निर्मित रचना यह अधम शरीर हैंप्रकृति में भी इन पंच तत्वों का समावेश हैं यदि इन पंच तत्वों में से कोई भी एक असंतुलित हो जाए तो संपूर्ण पर्यावरण असंतुलित हो जाता है जिसका दुष्प्रभाव मानव शरीर के मन और काया पर भी पड़ता हैं ,वायु ही आयु हैं हमारे शरीर में वायु प्राण वायु के रूप में विद्यमान हैं। हमने स्वच्छ वायु की उपादेयता और उसके महत्व को पहले ही समझ लिया था तभी तो ऋग्वेद में कहा गया हैं “वात आ वातु भेषजं मयोभु नो हदे
यददो बात ते गृहे अमृतस्य निधिर्हितः”
वायु की महत्ता को रेखांकित करने वाली उक्त पंक्तियों से आशय यही है कि वायु हमें औषधि दे जो शांति और आरोग्य प्रदान करे। इसमें निहित अमृत रूपी निधि हमारी आयु को बढ़ाकर हमें दीर्घजीवी बनाएँ।वर्तमान समय में औद्योगिकीकरण के कारण भी स्वच्छ वायु की प्राप्ति बड़ी समस्या हैं।

पर्यावरण में धूल,धुआं तथा खतरनाक रसायनों से की गंध वातावरण को प्रदूषित कर रही है। इस प्रदूषित हवा को सांस के द्वारा प्रत्येक क्षण लेते हैं जो हमारे फेंफड़ो और पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण के माध्यम से जाती हैं और अनगिनत स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनती है।

” हमारे सामूहिक प्रयासों के द्वारा वायु प्रदूषण को नियंत्रित कर सभी को शुद्ध वायु उपलब्ध कराई जा सकती है,औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना रिहायशी इलाकों से दूर होनी चाहिए, कारखानों में लंबी चिमनी का
प्रयोग फिल्टर और इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपिटेटर्स के साथ होना चाहिए। ऊर्जा के अज्वलनशील स्रोतों का उपयोग करना, पौधारोपण को बढ़ावा इत्यादि प्रयासो से स्वच्छ वायु का अधिकार प्रत्येक नागरिक को प्राप्त हो सकता है”

एड.प्रीतम सिंह जिलाध्यक्ष, भाजपा दमोह

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