7 एकड़ में फैले जैन मंदिर की भव्यता खींच रही श्रद्धालुओं का ध्यान, गुरुकुल में 50 से ज्यादा जैन – जैनेतर बच्चों को मिल रही निशुल्क शिक्षा
लाल-गुलाबी पत्थरों से तराशा गया तीन मंजिला मंदिर, स्वाध्याय भवन से पंचमेरु मंदिर तक अद्भुत है धार्मिक संरचना
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा हाईवे-18 पर फैक्ट्री चौराहा दीवानगंज स्थित ज्ञानोदय तीर्थधाम आज धर्म, अध्यात्म, शिक्षा और भारतीय स्थापत्य कला का अनूठा केंद्र बनकर पहचान बना रहा है। राजधानी भोपाल से करीब 22 किलोमीटर और विदिशा से लगभग 31 किलोमीटर दूरी पर स्थित यह भव्य दिगंबर जैन तीर्थस्थल अपनी आकर्षक बनावट, शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं एवं यात्रियों के आकर्षण का केंद्र है। सात एकड़ में फैले इस तीर्थधाम में जहां लाल और गुलाबी पत्थरों से निर्मित तीन मंजिला मंदिर अपनी सुंदरता से लोगों को आकर्षित करता है, वहीं यहां संचालित गुरुकुल बच्चों को निशुल्क शिक्षा देकर समाज सेवा की मिसाल पेश कर रहा है।
सात एकड़ में फैला है तीर्थ धाम, 2017 -18 में हुई स्थापना
श्री कुंद कुंद कहान दिगंबर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक जैन ने बताया कि ज्ञानोदय तीर्थधाम की स्थापना 6 फरवरी 2017 को हुई थी। इसके बाद 8 जुलाई 2018 को यहां गुरुकुल की स्थापना की गई। मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियों के साथ शिक्षा और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्य भी संचालित किए जा रहे हैं। शांत और प्राकृतिक वातावरण में स्थित यह तीर्थस्थल श्रद्धालुओं को दर्शन, ध्यान और स्वाध्याय का अवसर प्रदान करता है। हाईवे किनारे स्थित होने से भोपाल -विदिशा सहित आसपास के क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए यहां पहुंचना भी आसान है।

गुरुकुल में 50 बच्चों को निशुल्क शिक्षा और आवास
ज्ञानोदय तीर्थधाम की सबसे खास पहचान यहां संचालित गुरुकुल है। ट्रस्ट अध्यक्ष अशोक जैन के अनुसार ऐसे जरूरतमंद और होनहार बच्चों को यहां निशुल्क शिक्षा दी जाती है, जो आर्थिक तंगी या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते। बच्चों को अध्ययन के लिए संस्कृत केंद्रीय विश्वविद्यालय भेजा जाता है। गुरुकुल में कक्षा 11वीं से लेकर स्नातक (बीए) तक की पढ़ाई की व्यवस्था है। वर्तमान में 50 बच्चे अध्ययनरत हैं। इनके रहने, खाने और पढ़ाई का पूरा खर्च ट्रस्ट द्वारा उठाया जाता है। इस पहल से बच्चों को शिक्षा के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी मिल रहा है।
लाल-गुलाबी पत्थरों की नक्काशी से सजा तीन मंजिला मंदिर
तीर्थधाम का मुख्य मंदिर एवं मुख्य प्रवेश द्वार अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए विशेष पहचान रखता है। लाल और गुलाबी पत्थरों को बारीकी से तराशकर बनाई गई तीन मंजिला इमारत भारतीय वास्तुकला की सुंदरता को दर्शाती है। मंदिर के अंदर सुनहरे कांच की आकर्षक कारीगरी और दीवारों पर उकेरी गई पौराणिक चित्रकारी दर्शनार्थियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। मंदिर की हर मंजिल को अलग धार्मिक महत्व के अनुसार तैयार किया गया है।
तीन मंजिलों में दर्शन, ध्यान और आध्यात्मिक अनुभूति
मंदिर के निचले तल पर स्वाध्याय भवन बनाया गया है, जहां साधक जैन धर्म के शास्त्रों का अध्ययन और ध्यान करते हैं। प्रथम तल पर पंच बालयति जिनमंदिर स्थित है। यहां भगवान वासुपूज्य, भगवान नेमीनाथ, भगवान पार्श्वनाथ, भगवान मल्लिनाथ और भगवान महावीर की श्वेत संगमरमर से निर्मित प्रतिमाएं विराजमान हैं। मंदिर के सबसे ऊपरी तल पर पंचमेरु मंदिर बनाया गया है, जो जैन धर्मशास्त्रों में वर्णित पंचमेरु पर्वत की धार्मिक अवधारणा को दर्शाता है। इस प्रकार मंदिर की तीनों मंजिलें श्रद्धालुओं को दर्शन से लेकर स्वाध्याय और आध्यात्मिक चिंतन तक का अवसर प्रदान करती हैं।
धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर उभर रहा दीवानगंज
ज्ञानोदय तीर्थधाम के कारण दीवानगंज की धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी अलग पहचान बन रही है। महावीर जयंती, वार्षिक पंचकल्याणक और अन्य धार्मिक महोत्सवों के दौरान यहां विशेष आयोजन किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। भोपाल-विदिशा हाईवे 18 फैक्ट्री चौराहा दीवानगंज पर स्थित होने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ दूसरे जिलों से आने वाले यात्रियों के लिए भी यह प्रमुख धार्मिक पड़ाव बन रहा है। आस्था, स्थापत्य कला और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों के चलते ज्ञानोदय तीर्थधाम रायसेन जिले की एक महत्वपूर्ण पहचान बनता जा रहा है।
ज्ञानोदय तीर्थधाम जैन मंदिर दीवानगंज में पूरे साल भर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। जहां देश – विदेश से जैन समुदाय के लोग भारी संख्या में पहुंच कर दर्शन करते हैं।