देहरी तालाब के पास भीषण हादसा, टक्कर के बाद कार के एयरबैग खुलने से चालक की बची जान; डेढ़ घंटे तक सड़क किनारे पड़े रहे घायल, पुलिस की गाड़ी 112 की मदद से पहुंचाया अस्पताल
एक साल में 200 हादसे, 38 मौतों का ग्रामीणों ने किया दावा; अंधे मोड़, क्षतिग्रस्त सड़क और सुरक्षा इंतजामों की कमी बन रही हादसों की वजह
एक दिन पहले कुलहड़िया मोड़ पर पलटा था ऑटो, रोजाना दो से तीन दुर्घटनाओं का दावा; ग्रामीणों ने सड़क सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे-18 पर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा इंतजामों की कमी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती नजर आ रही है। हाईवे पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भानपुर से लेकर त्रिमूर्ति चौराहे और सलामतपुर तक आए दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। स्थिति यह है कि स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों के अनुसार इस मार्ग पर रोजाना दो से तीन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं।
सोमवार को दाल मिल चौराहे से आगे देहरी तालाब के पास 6 नंबर पर कार और मोटरसाइकिल की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसे में बाइक सवार तीन लोगों की जान चली गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए, जबकि अनियंत्रित कार सड़क से नीचे उतारकर पेड़ से टकराने से बाल बाल बच गई। कार के एयरबैग खुलने से चालक की जान बच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार को भोपाल से विदिशा की ओर जा रही कार क्रमांक MP04 WC 7361 और अंबाड़ी-दीवानगंज की ओर से भोपाल जा रही मोटरसाइकिल क्रमांक MP04 WA 7978 के बीच देहरी तालाब के नजदीक आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार कई फीट उछलकर सड़क पर जा गिरे। हादसे के बाद तीनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल होकर सड़क किनारे पड़े रहे। वहीं कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गई, टक्कर के दौरान कार के एयरबैग खुल गए, जिससे कार चालक को गंभीर चोट लगने से बचाव हुआ। जानकारी के अनुसार कार मनीष शिव हरे द्वारा चलाई जा रही थी।
हादसे में भोपाल और रेहटी के तीन लोगों की मौत
हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान राजकुमार साहू उम्र 50 वर्ष, निवासी आनंद नगर भोपाल, उनकी पत्नी माया साहू उम्र 45 वर्ष तथा सोनू साहू उम्र करीब 25 वर्ष, निवासी रेहटी के रूप में हुई है। बताया गया कि तीनों मोटरसाइकिल सवार दीवानगंज अंबाडी अपने रिश्तेदार के यहां आए थे यहां से वापस भोपाल जा रहे थे। तभी दुर्घटना हो गई। दुर्घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण और राहगीर मदद के लिए पहुंचे, लेकिन तीनों की हालत बेहद गंभीर थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस का इंतजार किया गया, लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच पाई। इसके बाद डायल-112 की मदद से तीनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एयरबैग खुलने से बची चालक की जान
कार और बाइक के बीच टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। बाइक सड़क पर दूर जा गिरी, जबकि कार टक्कर के बाद संतुलन खोकर सड़क किनारे उतर गई। हादसे में कार का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही कि टक्कर के दौरान कार के एयरबैग खुल गए, जिससे चालक को गंभीर चोटों से बचाव हुआ। दुर्घटना के बाद हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहगीरों और आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। क्षतिग्रस्त वाहनों के कारण सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
12 महीने में 200 हादसे, 38 लोगों की मौत का दावा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार भोपाल-विदिशा हाईवे-18 के इस हिस्से में पिछले 12 महीनों के दौरान छोटी-बड़ी करीब 200 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें लगभग 38 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे पर दुर्घटनाओं का मुख्य कारण कई स्थानों पर अंधे मोड़, सड़क में गड्ढे, धंसी हुई सड़क, क्षतिग्रस्त सुरक्षा रेलिंग और पर्याप्त संकेतकों का अभाव है। कई स्थानों पर वाहन चालकों को आगे आने वाले मोड़ और सड़क की स्थिति का समय रहते अंदाजा नहीं लग पाता। खासकर बालमपुर घाटी में सालभर दुर्घटनाएं सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा के इंतजामों में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।
अंधे मोड़ और क्षतिग्रस्त रेलिंग बन रहे हादसों की वजह
हाईवे पर कई ऐसे स्थान हैं, जहां सड़क के अंधे मोड़ वाहन चालकों के लिए खतरा बने हुए हैं। बालमपुर घाटी में सुरक्षा रेलिंग क्षतिग्रस्त होने के कारण वाहन चालकों को दुर्घटना का डर बना रहता है। वहीं भानपुर से त्रिमूर्ति चौराहे तक कई स्थानों पर सड़क में गहरे गड्ढे और उखड़ी सतह परेशानी बढ़ा रही है। वाहन चालकों का कहना है कि तेज रफ्तार से आने वाले वाहनों को अचानक सामने गड्ढा या मोड़ मिलने पर संभलने का मौका नहीं मिलता। कई बार वाहन चालक नियंत्रण खो बैठते हैं और दुर्घटनाएं हो जाती हैं। हाईवे पर पर्याप्त रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेतक और रोशनी की व्यवस्था भी जरूरी है।
एक दिन पहले कुलहड़िया मोड़ पर पलटा था ऑटो
हाईवे पर दुर्घटनाओं का सिलसिला कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार के भीषण हादसे से एक दिन पहले रविवार सुबह तड़के कुलहड़िया मोड़ पर कोहरे के कारण एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया था। हादसे में ऑटो चालक को मामूली चोटें आई थीं। कोहरे के कारण सड़क पर दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार दो दिनों में हुई इन दुर्घटनाओं ने एक बार फिर हाईवे की यातायात सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्दी की शुरुआत के साथ सुबह और रात के समय कोहरा भी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा सकता है।
ग्रामीणों ने एमपीआरडीसी और प्रशासन से की सुधार की मांग
लगातार हो रही दुर्घटनाओं से परेशान ग्रामीणों और वाहन चालकों ने एमपीआरडीसी तथा जिला प्रशासन से हाईवे की बदहाल स्थिति में तत्काल सुधार कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के धंसे हुए हिस्सों की स्थायी मरम्मत कराई जाए, बालमपुर घाटी की क्षतिग्रस्त सुरक्षा रेलिंग दोबारा लगाई जाए और अंधे मोड़ों पर पर्याप्त चेतावनी संकेतक लगाए जाएं। इसके साथ ही रात के समय पर्याप्त रोशनी, रिफ्लेक्टर, गति सीमा के बोर्ड और स्पीड कंट्रोल के इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि वाहन चालक समय रहते सावधान हो सकें।
जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे पर लगातार लोगों की जान जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। हर दुर्घटना के बाद कुछ समय तक चर्चा होती है, लेकिन सड़क सुरक्षा के इंतजामों में ठोस सुधार नजर नहीं आता। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क की मरम्मत, सुरक्षा रेलिंग की स्थापना और दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम शुरू नहीं किए गए तो वे एमपीआरडीसी और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि हाईवे पर सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई जरूरी है।