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सरकारी मूंग की बिक्री में 1100 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर! मगरधा के गिरिराज वेयरहाउस की उपार्जित मूंग पर उठे सवाल

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वर्ष 2023 की उपार्जित मूंग के टेंडर 5500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होने का दावा,

मगरधा के गिरिराज वेयरहाउस की मूंग 4400 रुपये में बिकी

गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था की जांच की मांग उठना जरूरी

रायसेन/बरेली। किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी गई कृषि उपज के भंडारण और उसके बाद बिक्री में पारदर्शिता को लेकर एक गंभीर सवाल सामने आया है। रायसेन जिले की बरेली तहसील के ग्राम मगरधा स्थित गिरिराज वेयरहाउस में भंडारित वर्ष 2023 की उपार्जित मूंग का विक्रय कथित तौर पर 4400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किया गया है। वहीं, दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2023 की उपार्जित मूंग के अन्य टेंडर 5500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुए। यदि इन दरों और संबंधित स्टॉक का विवरण सही है, तो एक ही उपार्जन वर्ष की मूंग की बिक्री दरों में 1100 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर कई सवाल खड़े करता है।

एक ही मूंग, लेकिन कीमत में 1100 रुपये का अंतर क्यों?

मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि आखिर गिरिराज वेयरहाउस, मगरधा में रखी मूंग को दूसरी जगहों की तुलना में इतनी कम कीमत पर क्यों बेचना पड़ा? क्या इस स्टॉक की गुणवत्ता बेहद खराब थी? क्या भंडारण के दौरान मूंग की स्थिति बिगड़ी? या फिर गुणवत्ता, नमी, खराब दानों और अन्य तकनीकी मानकों के आधार पर इसकी कीमत निर्धारित की गई?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग के रिकॉर्ड, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, स्टॉक निरीक्षण और टेंडर प्रक्रिया के दस्तावेजों से ही मिल सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर मूंग की खराब गुणवत्ता को संभावित कारण बताया जा रहा है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच जरूरी है।

खराब गुणवत्ता थी तो जिम्मेदार कौन?

यदि मूंग की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि उसे 5500 रुपये प्रति क्विंटल के बजाय केवल 4400 रुपये प्रति क्विंटल में बेचना पड़ा, तो यह जांच का विषय है कि उपार्जन के समय उसकी गुणवत्ता का परीक्षण किसने किया था। भंडारण के दौरान स्टॉक की निगरानी किस अधिकारी या एजेंसी की जिम्मेदारी थी? क्या समय-समय पर गुणवत्ता की जांच की गई? यदि मूंग लंबे समय तक वेयरहाउस में रखे रहने के कारण खराब हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है?

सरकारी उपार्जन व्यवस्था में किसानों से खरीदी गई उपज की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और भंडारित अनाज की उचित देखरेख करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। ऐसे में यदि किसी स्टॉक की कीमत में भारी गिरावट गुणवत्ता खराब होने के कारण आई है, तो उसके कारणों की जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

हर क्विंटल पर 1100 रुपये का अंतर, कुल नुकसान कितना?

5500 रुपये और 4400 रुपये प्रति क्विंटल की दरों के बीच 1100 रुपये का अंतर है। यदि संबंधित स्टॉक की बिक्री वास्तव में इन दरों के अंतर पर हुई है, तो संभावित राजस्व अंतर का आकलन स्टॉक की कुल मात्रा के आधार पर किया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि संबंधित मूंग की मात्रा 1000 क्विंटल हो, तो दोनों दरों के बीच कुल अंतर 11 लाख रुपये होगा। यह केवल गणना का उदाहरण है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। वास्तविक वित्तीय नुकसान निर्धारित करने के लिए संबंधित स्टॉक की कुल मात्रा, गुणवत्ता, नीलामी की शर्तों, बिक्री मूल्य और अन्य खर्चों का परीक्षण आवश्यक है।

विभागीय रिकॉर्ड से सामने आ सकता है पूरा सच

इस मामले में संबंधित अधिकारियों को गिरिराज वेयरहाउस में रखी मूंग की कुल मात्रा, उपार्जन के समय की गुणवत्ता रिपोर्ट, भंडारण अवधि के निरीक्षण रिकॉर्ड, नीलामी की शर्तें, टेंडर में प्राप्त दरें और अंतिम बिक्री आदेश सार्वजनिक करने चाहिए। साथ ही, वर्ष 2023 की अन्य उपार्जित मूंग के टेंडरों से तुलनात्मक परीक्षण कराया जाना चाहिए, ताकि स्पष्ट हो सके कि दरों में अंतर का कारण गुणवत्ता थी या कोई अन्य परिस्थिति।

यदि गुणवत्ता खराब होने के कारण सरकारी उपज का मूल्य घटा, तो यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि नुकसान प्राकृतिक कारणों, लंबे भंडारण, रखरखाव में कमी या किसी अन्य वजह से हुआ।

जांच और जवाबदेही जरूरी

गिरिराज वेयरहाउस, मगरधा में मूंग की कथित कम दर पर बिक्री का मामला केवल कीमत के अंतर तक सीमित नहीं है। यह सरकारी उपज की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। इसलिए संबंधित विभाग को दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच करानी चाहिए और निष्कर्ष सार्वजनिक करने चाहिए।

अब बड़ा सवाल यह है कि जब वर्ष 2023 की उपार्जित मूंग के अन्य टेंडर 5500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होने का दावा है, तो मगरधा के गिरिराज वेयरहाउस की मूंग 4400 रुपये प्रति क्विंटल में क्यों बिकी? क्या इसकी वजह वास्तव में खराब गुणवत्ता थी, और यदि हां, तो गुणवत्ता बिगड़ने के लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से सामने आना चाहिए।

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