रायसेन मंडी को डाबरा इमलिया ले जाने के प्रस्ताव पर व्यापारियों में नाराजगी, शहर के आसपास जमीन चयन की मांग
15-16 किलोमीटर दूर मंडी स्थानांतरित होने से कारोबार और मंडी राजस्व प्रभावित होने की आशंका
गल्ला व्यापारियों ने हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपकर जताया विरोध
दरगाह के पास और पठारी जेल के पीछे की सरकारी जमीन पर मंडी बनाने का दिया सुझाव
रायसेन। कृषि उपज मंडी समिति रायसेन को डाबरा इमलिया गांव में स्थानांतरित करने के लिए भूमि चयन की जानकारी सामने आने के बाद गल्ला व्यापारियों में नाराजगी बढ़ने लगी है। अधिकांश व्यापारी प्रस्तावित स्थान को जिला मुख्यालय से करीब 15 से 16 किलोमीटर दूर बताते हुए इस पर सवाल उठा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि मंडी शहर से इतनी दूर स्थापित होने पर न केवल उनके कारोबार पर असर पड़ेगा, बल्कि किसानों की आवक घटने से मंडी समिति के राजस्व को भी नुकसान हो सकता है। व्यापारियों ने अधिकारियों को हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपकर मंडी के लिए रायसेन शहर के आसपास ही उपयुक्त सरकारी जमीन का चयन करने की मांग की है।
व्यापारियों के मुताबिक कृषि उपज मंडी केवल अनाज की खरीद-बिक्री का स्थान नहीं है, बल्कि इससे किसानों, व्यापारियों, हम्मालों, परिवहन व्यवसायियों और अन्य लोगों की आजीविका भी जुड़ी हुई है। ऐसे में मंडी को शहर से काफी दूर ले जाने का निर्णय लेने से पहले किसानों और व्यापारियों की सुविधाओं, आवागमन, सुरक्षा तथा भविष्य के कारोबार पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाना जरूरी है।
मंडी दूर जाने से दूसरी मंडियों की ओर रुख कर सकते हैं किसान
व्यापारियों ने आशंका जताई है कि यदि रायसेन मंडी डाबरा इमलिया में स्थापित होती है, तो आसपास के गांवों से आने वाले किसानों के लिए यहां तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। दूरी बढ़ने के कारण भोपाल रोड क्षेत्र के गांवों के किसान अपनी उपज बेचने के लिए भोपाल मंडी का रुख कर सकते हैं। वहीं, अन्य क्षेत्रों के किसानों के विदिशा मंडी जाने की संभावना भी व्यापारियों ने जताई है।
व्यापारियों का मानना है कि किसानों को जिस मंडी में पहुंचना अधिक सुविधाजनक लगेगा, वे उसी का चयन करेंगे। ऐसी स्थिति में रायसेन मंडी में कृषि उपज की आवक कम हो सकती है। इसका सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने के साथ मंडी समिति को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ सकता है। हालांकि, आवक में कितनी कमी आएगी, इसका आकलन संबंधित विभाग के सर्वे और आंकड़ों से ही स्पष्ट हो सकेगा।

सीजन में प्रतिदिन 6 से 8 करोड़ रुपये का नकद भुगतान
व्यापारियों ने अधिकारियों को सौंपे गए पत्र में मंडी की दूरी बढ़ने से भुगतान व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि मंडी सीजन के दौरान प्रतिदिन लगभग 6 से 8 करोड़ रुपये का नकद भुगतान होता है। इतनी बड़ी राशि के लेनदेन के लिए व्यापारियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे भुगतान और अन्य व्यावसायिक व्यवस्थाओं में असुविधा हो सकती है।
व्यापारियों ने यह भी चिंता जताई है कि बड़ी रकम लेकर शहर से दूर आने-जाने में सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। उनके मुताबिक मंडी की स्थापना के लिए ऐसा स्थान चुना जाना चाहिए, जहां किसानों और व्यापारियों को आसानी से पहुंचने की सुविधा मिले तथा व्यापारिक गतिविधियों का संचालन सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से हो सके।
दरगाह के पास 70 एकड़ सरकारी जमीन का दिया सुझाव
मंडी के लिए वैकल्पिक स्थानों का सुझाव देते हुए व्यापारियों ने रायसेन शहर में दरगाह के पास स्थित करीब 70 एकड़ सरकारी जमीन का उल्लेख किया है। व्यापारियों के अनुसार इस जमीन का उपयोग फिलहाल नगरपालिका द्वारा कचरा डालने के लिए किया जाता है। उनका कहना है कि शहर के नजदीक होने के कारण यह स्थान कृषि उपज मंडी के लिए अधिक सुविधाजनक साबित हो सकता है।
व्यापारियों का सुझाव है कि यदि इस जमीन पर मंडी विकसित करने की संभावना तलाशी जाए, तो नगरपालिका के लिए शहर से दूर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर कचरा निस्तारण की व्यवस्था की जा सकती है। इससे एक ओर शहर के नजदीक मंडी स्थापित करने का विकल्प मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर कचरा प्रबंधन के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
हालांकि, इस जमीन की वास्तविक उपलब्धता, स्वामित्व, भूमि उपयोग, पर्यावरणीय पहलुओं और मंडी निर्माण की तकनीकी उपयुक्तता की जांच संबंधित विभागों द्वारा किया जाना आवश्यक होगा।
पठारी जेल के पीछे की जमीन पर भी विचार करने की मांग
व्यापारियों ने मंडी निर्माण के लिए पठारी जेल के पीछे उपलब्ध सरकारी जमीन को भी एक संभावित विकल्प बताया है। उनका कहना है कि डाबरा इमलिया में जमीन आवंटित करने से पहले शहर के आसपास उपलब्ध सभी सरकारी जमीनों का सर्वे कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सबसे उपयुक्त स्थान का चयन किया जा सके।
व्यापारियों के मुताबिक मंडी के लिए ऐसी जगह जरूरी है, जहां किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य कृषि वाहनों की आवाजाही आसान हो, अनाज की खरीद-बिक्री सुचारु रूप से संचालित हो तथा व्यापारियों को भुगतान और परिवहन संबंधी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपकर रखी मांग
मंडी स्थानांतरण को लेकर व्यापारियों ने कृषि उपज मंडी समिति रायसेन के भारसाधक अधिकारी के नाम हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपा है। पत्र में समाचार पत्रों के माध्यम से डाबरा इमलिया में मंडी स्थानांतरित किए जाने की जानकारी मिलने का उल्लेख करते हुए प्रस्तावित स्थान की दूरी पर आपत्ति जताई गई है।
पत्र में कहा गया है कि रायसेन नगर से लगभग 14-15 किलोमीटर दूर मंडी स्थापित होने पर अन्य मंडियों की तुलना में दूरी अधिक होने के कारण रायसेन मंडी में कृषि उपज की आवक घट सकती है। इससे व्यापारियों को नुकसान होने के साथ मंडी समिति के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। पत्र में भुगतान और अन्य व्यावसायिक असुविधाओं का हवाला देते हुए अधिकारियों से आग्रह किया गया है कि मंडी के लिए रायसेन नगर के आसपास ही जमीन का चयन किया जाए।
निर्णय से पहले व्यापारियों की आपत्तियों पर विचार करने की मांग
व्यापारियों की इस मांग के बाद मंडी के प्रस्तावित स्थान को लेकर चर्चा तेज होने की संभावना है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी स्थानांतरण जैसे महत्वपूर्ण निर्णय में किसानों, व्यापारियों और मंडी से जुड़े अन्य हितधारकों की राय को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि नई मंडी ऐसी जगह विकसित हो, जहां भविष्य में कारोबार का विस्तार हो सके और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरी मंडियों का रुख करने की जरूरत न पड़े।
अब देखने वाली बात होगी कि मंडी समिति और संबंधित प्रशासन व्यापारियों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाते हैं तथा डाबरा इमलिया के प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले शहर के आसपास उपलब्ध वैकल्पिक सरकारी जमीनों की संभावनाओं का परीक्षण किया जाता है या नहीं। फिलहाल व्यापारियों की प्रमुख मांग यही है कि रायसेन मंडी का स्थानांतरण ऐसा हो, जिससे किसानों की सुविधा, व्यापारिक हितों और मंडी समिति के राजस्व—तीनों का संरक्षण हो सके।
रायसेन व्यापार संघ ने भी जताया विरोध
रायसेन व्यापार संघ के अध्यक्ष संतोष साहू ने भी डाबरा इमलिया गांव में मंडी के लिए भूमि के चयन पर आपत्ति जताते हुए आक्रोश व्यक्त किया हे। श्री साहू ने कहा हे कि मंडी यदि शहर से इतनी दूर जाएगी तो रायसेन शहर के छोटे बड़े सभी व्यापारियों के व्यवसाय चौपट हो जायेंगे।क्योंकि रायसेन कृषि प्रधान क्षेत्र हे यहां कृषि पर ही सारा व्यवसाय निर्भर हे। श्री साहू ने दरगाह के पास सरकारी चयन करने का सुझाव दिया हे।