मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले दीवानगंज क्षेत्र में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जिस इलाके में कभी सोयाबीन की भरपूर खेती होती थी, वहां अब किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती की ओर अग्रसर हो गए हैं। पिछले करीब पांच वर्षों में किसानों ने मौसम, उत्पादन और आर्थिक लाभ को देखते हुए अपनी फसल पद्धति में बदलाव किया है।
इसी बदलाव की एक मनमोहक तस्वीर ग्राम सेमरा में देखने को मिली। गांव के एक किसान अपने खेत में धान का गड़ा (नर्सरी) तैयार कर रहे थे, तभी अचानक आसमान से 50 से अधिक सफेद बगुले उड़ते हुए खेत में उतर आए। बगुले धान के गड़े में मौजूद कीड़े-मकोड़ों और अन्य छोटे जीवों की तलाश में भोजन करते नजर आए। यह दृश्य कुछ देर तक चलता रहा और ग्रामीणों ने इसे अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान के खेतों में नमी और जैविक गतिविधियां अधिक होने के कारण बगुलों जैसे पक्षियों को भरपूर भोजन मिलता है। पक्षियों की यह मौजूदगी खेतों के बेहतर प्राकृतिक संतुलन और जैव विविधता का भी संकेत मानी जाती है।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि पहले यहां सोयाबीन प्रमुख फसल थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में धान की खेती का रकबा लगातार बढ़ा है। इससे खेतों का वातावरण भी बदला है और अब बरसात के मौसम में बगुलों सहित कई प्रवासी और स्थानीय पक्षी खेतों में दिखाई देने लगे हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि खेतों में लौटते पक्षियों के झुंड न केवल प्रकृति की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि यह इस बात का भी संकेत हैं कि खेती और पर्यावरण के बीच संतुलन फिर से मजबूत हो रहा है।