आलेख
संदीप भम्मरकर
दतिया की राजनीति इन दिनों किसी वेब सीरीज़ से कम नहीं। हर एपिसोड में नया ट्विस्ट। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती पर कोर्ट का शिकंजा कसते ही हवा में उपचुनाव की हल्की-हल्की सनसनी घुल गई है। उधर, बंद कमरों की मीटिंग्स और दिग्गज नेताओं के साथ नरोत्तम मिश्रा संग मुस्कुराती तस्वीरें इशारा कर रही हैं कि पर्दे के पीछे कोई बड़ा प्लॉट पक रहा है। गलियारों में फुसफुसाहट है कि ये सिर्फ तस्वीरें नहीं, एंट्री सीन की रिहर्सल है। इधर राजेंद्र भारती भोपाल में ‘सपोर्ट स्क्रिप्ट’ तलाशते दिखे। दर्द ये कि बीजेपी में ऐसा हुआ होता तो पूरी पार्टी उसके साथ नजर आती। राजेंद्र भारती का दर्द और बीजेपी में बढ़ती हलचलों से सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि दतिया एपिसोड अभी खत्म नहीं हुआ है, असली क्लाइमेक्स अभी बाकी है।

प्रशासन में नई पीढ़ी की एंट्री
मंत्रालय के गलियारों में इन दिनों फाइलों की तरह चेहरों भी चर्चा के केंद्र में है। चेहरे भी नए-नवेले। परंपरा को हल्का सा साइड कर इस बार कुर्सियों पर ‘नई ऊर्जा’ बैठी नजर आ रही है। हर अहम पोस्ट पर फ्रेश फेस, और पुराने दिग्गज हल्की मुस्कान के पीछे गणित बिठाते दिख रहे हैं। इसे सीएम का ‘जनरेशन शिफ्ट’ मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है। भरोसा अनुभव से ज्यादा एक्सपेरिमेंट पर है। जो अफसर अब तक साइड रोल में थे, वे अचानक लीड रोल में चमक रहे हैं। आला अफसरों के बीच चर्चा है कि नई टोली प्रशासन की पिच पर छक्के जड़ सकेगी या उनकी पारी भी धुंधलके में खो जाएगी।

मंच पर मलाईदार माइक मोमेंट
रायसेन के मंच पर इस बार माइक ने सिर्फ आवाज नहीं, सियासी तापमान भी बढ़ाया। आईएएस निशांत वरवड़े ने भाषण में ऐसी ‘मलाई’ घोली कि तालियां भी थोड़ी मुस्कुराती सी लगीं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ में उन्होंने कहा कि शिवराज ने कार्यक्रम की ऐसी तैयारी की जैसी घर की शादी के दौरान की जाती है। दिलचस्प ये कि मंच पर शिवराज और सीएम मोहन यादव दोनों मौजूद थे, और गलियारों में इस स्पीच के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। बहरहाल, नए-नवेले कृषि विभाग में एंट्री के साथ ही वरवड़े ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी। लेकिन सियासत की बारीकियां समझने वाले ये कह रहे हैं कि शब्दों की इस मिठास से आगे रास्ता बनाया जा रहा है।

इंदौर मीटिंग का मायाजाल !
इंदौर की नगर निगम की बैठकों में इन दिनों एजेंडा कम, अचरज ज्यादा परोसा जा रहा है। हालिया वंदे मातरम विवाद के बाद भोपाल के सियासी कमरों में माथा-पच्ची जारी है। जवाब तलाशे जा रहे हैं कि आखिर हर मीटिंग ‘विवाद स्पेशल’ क्यों बन रही है? बीजेपी के पुराने वीडियो को जारी करके पलटवार किया जा रहा है तो कांग्रेस इसे साजिश का ताना-बाना भी बता रही है। दिलचस्प ये कि ये पहला मौका नहीं है। पन्ने पलटेंगे तो नमाज़ एपिसोड समेत पिछली बैठकों ने भी सुर्खियों की याद ताजा हो जाएंगी है। अब इस नए सवाल का जवाब कौन खोजेगा कि मीटिंग शुरू होते ही मुद्दे भटकते क्यों हैं? कहीं ये इत्तेफाक है… या नगर निगम की हर अहम बैठक के दौरान सुर्खियां गढ़ने की तलाश पहले से शुरू कर दी जाती हैं।
कांग्रेस विधायकों की पुलिस फाइल
थानों की धूल झाड़ती फाइलें अचानक वीआईपी ट्रीटमेंट पा रही हैं। वैसे तो कांग्रेस के कई विधायकों की पुरानी केस-फाइलें खुली किताब हैं, लेकिन असली फोकस दो नामों पर है। इनकी कहानी भी दतिया वाले ट्विस्ट जैसी बताई जा रही है। लोकल बीजेपी लीडर इन फाइलों को भोपाल के पावर सेंटर्स तक पहुंचाते दिख रहे हैं, मानो शतरंज की कोई बिसात सजाई जा रही हो। इधर राज्यसभा का गणित पहले ही माइनस तीन पर अटका है, और अगर ये दो मोहरे भी खिसके तो स्कोर माइनस पांच! अब देखना है कि सियासत का ये खेल किस अंजाम तक पहुंचता है।

शिक्षा महकमे में मैडम मिस्ट्री
शिक्षा विभाग की फाइलें क्राइम थ्रिलर बन गई हैं। घोटाले की परतें उखड़ीं तो कहानी के बीचोंबीच एक ‘रहस्यमयी मैडम’ का किरदार उभर आया। ये मैडम पूरे प्रदेश में काम सेट कराने की कला में माहिर बताई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि जहां जरूरत, वहां मैडम की एंट्री तय। मंत्री के सख्त तेवरों के बाद जांच की रफ्तार तेज हुई तो सुराग बार-बार उसी चेहरे की ओर इशारा कर रहे हैं। अब जांच अधिकारी उस ‘इनविज़िबल इंफ्लुएंस’ को ढूंढ रहे हैं। जवाब की तलाश तेज है कि मैडम की हकीकत क्या है और सिस्टम के अदृश्य हेल्पिंग हैंड्स कौन?

-लेखक मप्र के वरिष्ठ पत्रकार हैं।