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शिव के दिव्य प्रकाश में दमकती संस्कृति, लोक के रंग, शास्त्र का सौंदर्य एवं सुरों के माधुर्य तक महादेव

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भोजपुर मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव का दूसरा दिवस

सी एल गौर रायसेन

मध्‍यप्रदेश शासन, संस्‍कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन रायसेन के सहयोग से ऐतिहासिक एवं प्राचीन स्‍थल भोजपुर के मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर तीन दिवसीय ‘‘महादेव’’ भोजपुर महोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्‍सव के दूसरे दिवस भी नृत्‍य, संगीत एवं लोक परम्‍पराओं की सौंदर्यपूर्ण छटा बिखरी। इस अवसर पर बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु श्रोता एवं दर्शक उपस्थित रहे। कलाकारों का स्वागत उप संचालक संस्कृति डॉ.पूजा शुक्ला एवं भोजपुर मंदिर के महंत पवन गिरी महाराज ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।

दूसरे दिवस की पहली प्रस्‍तुति बघेली लोकगायन की रही। सुश्री शीला त्रिपाठी एवं साथी, भोपाल द्वारा सुमधुर आवाज में बघेलखण्‍ड की परम्‍पराओं में भगवान शिव की महिमा का गायन किया। उन्‍होंने अपने गायन की प्रारम्‍भ गौरी गणेश मनाऊं…. गीत के साथ किया। इसके बाद तप करत उमा जी आज…., मोरे अंगना मा आये भोलेनाथ…., चली भोले की बरतिया हिमांचल नगरी…. एवं गउरा का ब्‍याहन आये महादेव…. गीतों से महाशिवरात्रि की अलौकिकता और दिव्‍यता की धारा प्रवाहित कर दी। श्रोताओं ने आनन्‍द में डूबकर इन गीतों का रसपान किया।अंत में उन्‍होंने भोला मॉगय गवनवा होली मा…. के साथ प्रस्‍तुति को विराम दिया।

अगली प्रस्‍तुति शिव केन्द्रित नृत्‍यनाटिका की रही। जिसे सुश्री आकृति जैन एवं साथी, भोपाल द्वारा प्रस्‍तुत किया गया। उन्‍होंने कथक शैली में नृत्‍यनाटिका की प्रस्‍तुति दी। रूपक ताल में अर्धनारीश्‍वर कथा को दर्शाया। इसके बाद शिवोहम के माध्‍यम से भगवान शिव के स्‍वरूप को दर्शाया। इस प्रस्‍तुति ने अद्वैत वेदांत की उस भावना को दर्शाया जिसमें आत्मा और परमात्मा को एक माना जाता है। इसके बाद शिव और सती प्रसंग, दक्ष प्रसंग, शिव पार्वती विवाह एवं शिव तांडव स्‍तोत्रम के साथ प्रस्‍तुति को विराम दिया। सुश्री आकृति जैन के साथ आठ नृत्‍यांगनाओं ने प्रस्‍तुति दी।

दूसरे दिवस की अंतिम प्रस्‍तुति सुविख्‍यात गायिका सुश्री महालक्ष्‍मी अय्यर एवं साथी, मुम्‍बई की सुगम संगीत की रही। उन्होंने अपनी मधुर, सुरमयी और प्रभावपूर्ण आवाज में शिव-स्तुति एवं लोकप्रिय रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

शास्त्रीयता और आधुनिकता के सुंदर संगम ने सम्‍पूर्ण परिसर को भक्तिमय और संगीतामृत से परिपूर्ण कर दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत शिव कैलाशों के वासी…. गीत से करते हुए परिसर को शिवमय कर दिया। इसके बाद नमो नमो शंकरा…., शिव तांडव स्त्रोतम्…. एवं बम लहरी….गाते हुए श्रोताओं को भक्तिमय आनंद में भिगो दिया। इसके बाद उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति दी।

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