एस के एम का ‘भाव दो खाद दो, आन्दोलन
भोपाल ।15 अक्टूबर को प्रदेश भर में कलेक्टरी, तहसीलों पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश के नाम से संबोधित ज्ञापनों के देने के 10 दिन में भी कोई सकारात्मक कार्यवाही न होने पर किसानों ने 27 अक्टूबर को राजधानी में आकर प्रदर्शन करने का फैसला लिया है । संयुक्त किसान मोर्चे के समन्वय समूह की बैठक ने प्रदेश भर में हुई कार्यवाहियों की समीक्षा की और 27 अक्टूबर के आन्दोलन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया ।
किसान जाग्रति संगठन के इरफ़ान जाफरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव, क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के बाबूसिंह राजपूत सहित बाकी संगठनों की डिजिटल भागीदारी रही ।
एस के एम ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा करने का आह्वान किया है ।
‘भाव दो खाद दो, मुआवजा दो, जमीन की लूट बंद करो’ के इस आन्दोलन में संयुक्त किसान मोर्चे ने जो 10 मांगें उठाई हैं उनमें 1- भावान्तर नहीं भाव चाहिए ; वर्तमान में घोषित भावान्तर योजना किसानों की नहीं कुछ बड़ी कंपनियों के फायदे के लिए है । इसे तुरंत वापस लिया जाए और सख्ती के साथ सोयाबीन सहित सभी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य से खरीद सुनिश्चित की जाए । इससे कम पर खरीदने को दंडनीय अपराध मानकर कार्यवाही की जाए । 2 – दो साल पहले चुनाव घोषणापत्र में धान की कीमत 3100 रुपये प्रति क्विंटल देने का वादा किया गया था । उसके अनुपात इस वर्ष धान की खरीदी का मूल्य 3300 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए । 3 – अतिवृष्टि से हुए नुकसान का नजरिया या सॅटॅलाइट सर्वे करने की बजाय पटवारी हलके को इकाई मानकर औसत उपज की तुलना में आई कमी को आधार बनाकर क्षति का पूरा मुआवजा दिया जाए । इसी तरह बीमा कंपनियों द्वारा की जा रही धांधली और धोखाधड़ी रोककर नुक्सान की पूरी भरपाई की जाए । 4 – खाद का संकट सरकार की अक्षमता और असफलता के कारण है । जरूरत पड़ने के पहले ही खाद का पर्याप्त भण्डारण किया जाए और हरेक किसान को उसकी आवश्यकता के अनुरूप खाद उपलब्ध कराया जाए । 5 – मध्यप्रदेश नकली खाद और बीज का अड्डा बना हुआ है । इनके सौदागरों और कृत्रिम संकट पैदाकर उनकी मदद करने वाले अधिकारियों को जेल भेजकर समुचित दंड दिया जाए । 6 – प्रदेश में लैंड पूलिंग की धोखाधड़ी और अलग अलग परियोजनाओं, कथित एक्सप्रेस वे, अभयारण्यों आदि इत्यादि के नाम पर जबरिया अधिग्रहण और बेदखली रोकी जाए । किसान की मर्जी और ग्राम सभा की वास्तविक मंजूरी और 2013 भूमि अधिग्रहण क़ानून के आधार पर मुआवजे और पुनर्वास के बिना जमीन अधिग्रहण नहीं किया जाए । 7 – किसानो को कमसेकम 12 घंटे बिजली दी जाए । बिजली दिन के समय दी जाए । बढ़ाचढ़ा कर भेजे गए बिजली बिल निरस्त किये जाएँ । स्मार्ट मीटर की योजना रद्द की जाए । 8 – आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देते हुए उनके एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए । 9 – टैरिफ से पड़ने वाले असर से किसानों को बचाने के लिए अंतर की राशि का भुगतान सरकार करे । जो मुक्त व्यापार समझौते किये जा रहे हैं उनके दायरे के कृषि को बाहर रखा जाए । इन दोनों के चलते कपास उत्पादक किसानों को हुए घाटे की पूर्ति की जाये । 10 – रबी की फसल के लिए हाल ही में घोषित की गयी न्यूनतम समर्थन मूल्य की दरें अनुचित और अपर्याप्त हैं । स्वामीनाथन आयोग की दरों की तुलना में इन दरों से देश के किसानो को 3 लाख करोड़ रुपयों से अधिक का नकद नुक्सान होने वाला है । इन दरों को वापस लेकर नई दरों का निर्धारण किसान संगठनो के साथ मिलकर किया जाये ।
उपरोक्त संगठनों के चार नेताओं सहित मप्र किसान सभा (शाकिर सदन) के प्रहलाद वैरागी, अखिलेश यादव (मप्र किसान सभा बी टी आर भवन) मनीष श्रीवास्तव (आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन), भगवान भाई (नर्मदा बचाओ आन्दोलन), आराधना भार्गव (किसान संघर्ष समिति), बी के यू (महाशक्ति) के प्रदेश अध्यक्ष राम जगदीश दांगी, विजय कुमार (आल इंडिया किसान क्रांतिकारी सभा), उमेश तिवारी (टोको, रोको, ठोको मोर्चा), बबलू जाधव (भारतीय किसान एवं मजदूर सेना) संदीप सिंह ठाकुर (भारतीय श्रमिक जनशक्ति यूनियन), बुद्धसेन सिंह गोंड (मप्र आदिवासी एकता महासभा), , राजकुमार सिन्हा (एन ए पी एम एवं बरगी बाँध विस्थापित एवं प्रभावित संघ, चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति) ने भी इन निर्णयों का समर्थन किया है ।