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एक जुट नाट्य समारोह के अंतिम दिन नाटक “लाला हरदौल “का हुआ मंचन

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सुनील सोन्हिया की रिपोर्ट
भोपाल। रंगकर्मी अनिल पवार की स्मृति में आयोजित पाँचवे एकजुट नाट्य समारोह के अंतिम दिन हम थियेटर ग्रुप ने कोमल कल्याण जैन द्वारा लिखित नाटक “लाला हरदौल “ का 99 वाँ शो बालेंद्र सिंह के निर्देशन में खेला गया ।

लाला हरदौल की कहानी एक लोककथा है जिसमें ओरछा के राजकुमार हरदौल को भाई जुझार सिंह द्वारा भाभी चंपावती के साथ अवैध संबंधों के झूठे आरोप में जहर देकर मार दिया गया था, क्योंकि लाला हरदौल ने भाभी के सम्मान की रक्षा के लिए स्वयं जहर पी लिया था, और आज भी उन्हें बुंदेलखंड में एक देवता के रूप में पूजा जाता है और विशेषकर विवाह के अवसरों पर उनका भात चढ़ाया जाता है.

कहानी का सारांश:
परिचय: लाला हरदौल ओरछा के राजा वीर सिंह देव के पुत्र और जुझार सिंह के छोटे भाई थे. उनका लालन-पालन बड़े भाई जुझार सिंह की पत्नी, चंपावती ने किया था, जिससे उनके बीच बहुत स्नेह था.
साजिश और शक: कुछ लोग जुझार सिंह के मन में ईर्ष्या और शक पैदा कर देते हैं, जिससे राजा को अपनी पत्नी और हरदौल के बीच अनुचित संबंधों का संदेह होता है.
रानी का आदेश और हरदौल का बलिदान: राजा की आज्ञा पर, रानी को हरदौल को जहर देना था, लेकिन हरदौल ने अपनी भाभी की इज्जत बचाने के लिए, रानी की बात सुनकर, खुद ही जहर पी लिया और हंसते-हंसते अपनी जान दे दी.

जादुई चमत्कार: हरदौल के मरने के बाद, उनकी बहन कुंजावती अपनी बेटी के विवाह में भात मांगने गईं. जब जुझार सिंह ने मना कर दिया, तो कुंजावती हरदौल की समाधि पर गईं और भात मांगा. ऐसा माना जाता है कि हरदौल ने खुद समाधि से निकलकर भात पहुँचाया.
लोक देवता के रूप में पूजा: इस चमत्कार के बाद, हरदौल को देवता तुल्य मानकर उनकी पूजा की जाने लगी. आज भी, बुंदेलखंड में लड़कियों के विवाह से पहले उनके सम्मान में पहला भात लाला हरदौल को चढ़ाया जाता है, और गांवों में उनके चबूतरे बनाए गए हैं.
मुख्य कारण जिससे वे पूजनीय हैं:
भाई-बहन का प्रेम:
कहानी में भाई-बहन के गहरे प्रेम और लाला हरदौल द्वारा अपनी भाभी की लाज बचाने का वर्णन है.

पतिव्रत धर्म की रक्षा:
लाला हरदौल ने रानी चंपावती का दामन पाक साफ रखने के लिए अपनी जान दे दी, जो पतिव्रता धर्म का ही एक रूप है.
देवता का दर्जा:
उनकी मृत्यु के बाद हुए चमत्कारों और उनके महान त्याग के कारण उन्हें देवता माना जाता है और उनकी भक्ति के लिए उन्हें पूजा जाता है.
नाटक का संगीत रविलाल सांगड़े ने तैयार किया था । गीत संगीत से भरपूर यह नाटक देश प्रेम, वीरता और बलिदान का संदेश देता है ।

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